भाई-बहन के परस्पर प्रेम और स्नेह का प्रतीक भाई दूज
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कैसे मनाएं भाई दूज

जानिए भाई दूज मनाने की तिथि और नियम

भाई दूज (यम द्वितीया) कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष में द्वितीया तिथि जब अपराह्न (दिन का चौथा भाग) के समय आये तो उस दिन भाई दूज मनाई जाती है।

कायस्थ समाज में इसी दिन अपने आराध्य देव चित्रगुप्त की पूजा की जाती है। कायस्थ लोग स्वर्ग में धर्मराज का लेखा-जोखा रखने वाले चित्रगुप्त का पूजन सामूहिक रूप से तस्वीरों अथवा मूर्तियों के माध्यम से करते हैं। वे इस दिन कारोबारी बहीखातों की पूजा भी करते हैं।

यदि दोनों दिन अपराह्न के समय द्वितीया तिथि लग जाती है तो भाई दूज अगले दिन मनाने का विधान है। इसके अलावा यदि दोनों दिन अपराह्न के समय द्वितीया तिथि नहीं आती है तो भी भाई दूज अगले दिन मनाई जानी चाहिए। ये तीनों मत अधिक प्रचलित और मान्य है।

एक अन्य मत के अनुसार अगर कार्तिक शुक्ल पक्ष में जब मध्याह्न (दिन का तीसरा भाग) के समय प्रतिपदा तिथि शुरू हो तो भाई दूज मनाना चाहिए। हालांकि यह मत तर्क संगत नहीं बताया जाता है। भाई दूज के दिन दोपहर के बाद ही भाई को तिलक व भोजन कराना चाहिए। इसके अलावा यम पूजन भी दोपहर के बाद किया जाना चाहिए।

भाईदूज दोपहर के बाद मनाया जाता है.

भाई-बहन के परस्पर प्रेम और स्नेह का प्रतीक त्यौहार पूरे देश में मनाए जाने वाले इस त्योहार के दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उनके उज्ज्वल भविष्य और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं. भाई दूज या भैया दूज का यह त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र के लिए कामना करेंगी. भाई दूज को भाऊ बीज और भातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है.

भाई दूज भी रक्षाबंधन की तरह है भाई-बहन के रिश्ते को मनाने का त्योहार है. भाईदूज दोपहर के बाद मनाया जाता है. इस दिन दोपहर के बाद बहनें भाई को तिलक करती हैं. कुछ बहनें इस दिन दोपहर तक व्रत भी रखती हैं. इस दिन दोपहर के बाद यम पूजन करने का भी प्रावधान है.

आइये देखें कुछ Bollywood के भाई बहन

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