महिलायें पीरियड्स के दौरान भगवान् को भोग कैसे लगाएं?
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Can I worship during periods?

Periods की समस्या पर एक विचार – सबको अपने इष्ट प्यारे होते हैं और हो भी क्यों नहीं, आखिर उनकी सूरत ही बड़ी मोहिनी होती है। जब हम अपने इष्ट से अपनापन जोड़ लेते हैं तो उनके बिना रह पाना संभव ही नहीं होता है और जब यह अपनापन चरम सीमा पर पहुंच जाए तो उस स्थिति का तो शब्दों में वर्णन किया ही नहीं जा सकता है। फिर वो इष्ट बाल गोपाल के रूप में हो या रामलला के रूप में।

प्राय: देखा जाता है कि महिलाएं घर पर अपने बाल गोपाल या रामलला की पूजा प्रतिदिन बड़े प्यार से स्रान कराती हैं एवं भोग लगाती हैं। उसके बाद ही उनका दिन प्रारंभ होता है। क्योंकि प्रभु की सेवा के बिना दिन की शुरूआत करना बहुत ही अधुरा सा लगता है। सेवा भी इतने भाव से की जाती है कि दिन का कोई भी क्षण उनके बिना नहीं रहा जाता है। हर समय अपने बाल गोपाल या रामलला को देखे बिना उनसे बातें करें बिना नहीं रहा जाता है। कहने का इतना ही तात्पर्य है कि वो अपने प्रभु को एक क्षण भी अकेला नहीं छोड़ती हैं।

अपने देखा होगा कि पुरूष हो या महिलाएं भक्त अपने भगवान की सेवा करता ही है उनकी सेवा के बिना उसका जीवन क्या एक दिन भी अधूरा सा होता है। मगर हमारी भारतीय धर्म नियमों के अनुसार यहां पुरूष तो बहुत कम नियमों से बंधे है परंतु महिलाओं की तरफ देखें तो उनके एक ऐसा समय उनके जीवन का होता है यहां वो चाह कर भी अपने इष्ट की सेवा पूर्ण नहीं कर पाती है और वो समय है महिलाओं का मासिक धर्म।

हमारी Indian Culture एवं Hindu rituals के अनुसार महिलाओं को सामाजिक एवं धार्मिक नियमों के अंतर्गत रखा जाता गया है, जिसमें कई कानून-नियम बतलाएं गये हैं। इनमें से महिला का मासिक धर्म यानी पीरियड्स के दौरान पूजा-पाठ या किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में शामिल न होना बतलाया गया है।

अब Periods के दौरान महिलाएं क्या करें

हमारी महिलाओं के लिए यह बड़ी चिंता का विषय है कि वो ऐसे समय में कैसे अपने बाल गोपाल या रामलला से दूर रहें। क्योंकि बिना उन्हें भोग लगाये वो कैसे पा सकती हैं। तो यहां हमारे कुछ धर्म शास्त्रों और गुरूओं ने कई रास्ते बतलाएं हैं।

धार्मिक दृष्टि से देखें तो महिलाएं ऐसे समय में अपने इष्ट के लिए स्वयं भोग न लगाकर अपने घर के ही किसी सदस्य से भोग लगवा सकती हैं और महिलाएं उस समय में भगवान नाम का जाप करके भी भगवान को प्रसन्न कर सकती हैं। मगर यह तरीका सिर्फ कर्मकांडी है भक्त प्रेम नहीं। ऐसा करने से आप अपने धर्म का पालन तो कर रही हैं परंतु भगवान तो आपके अपने प्रिय हैं और इतने प्रिय की जितने आपके घर के सदस्य भी नहीं तो यहां आप भगवान से दूर कैसे रह सकती हैं।

यहां दो बातें है जो विचारणीय हैं। 

पहली बात – भक्त कैसा भी हो भगवान उसके लिए केवल शरीर तक सीमित नहीं होते हैं। भगवान को जीव की आत्मा से उसके विचारों से संबंध होता है। पीरियड्स शरीर की एक प्रक्रिया है उससे आत्मा का कोई संबंध नहीं है और शरीर तो अशुद्ध ही है वो शुद्ध होता तो हम आत्मा की जरूरत ही नहीं होती। शरीर इस मायिक पांच भूतों से बना हुआ है जो अशुद्ध अथवा मायिक ही हैं तो शरीर कभी शुद्ध होता ही नहीं।

दूसरी बात – भगवान भक्त के लिए केवल एक मूर्ति नहीं है वो उसकी प्राण है, फिर प्राण से जीव कैसे दूर रह सकता है। कई शास्त्रों और उपनिषदों में बतलाया गया है कि मनुष्य के शरीर में ईश्वर सात केन्द्रों में कमल पर विराजमान हैं फिर वो ईश्वर पीरियड्स के दौरान शरीर के बाहर नहीं जाता है तो हम अपने प्यार बाल गोपाल से दूर कैसे जाएं बल्कि कैसे दूर जाया जाये,जाया ही नहीं जा सकता।
यहां दोनों बातों से मुझे लगता है कि किसी भी प्रकार से भक्त अपने ईष्ट से दूर नहीं रह सकता।

ये प्रेम की बात है 

भक्त और भगवान का रिश्ता जब प्रेम का हो जाता है तो फिर उसके लिए वो पराये नहीं होते हैं और कहा जाता है कि भगवान जब ही मिलते हैं जब आप सारे बंधनों से मुक्त हो जाएं तो क्या पुरूष ही भगवान को प्राप्त कर सकता है एवं महिलाएं अपने पीरियड्स के खत्म होने का इंतजार करें। जब वे अधैड़ उम्र की जाएं जब भगवान मिलेंगे।

भगवान तो निरंतर मिले हुए ही हैं बस आपको यह एहसास हो जाएं और जब भगवान से आप जब पूरी ईमानदारी से प्रेम का रिश्ता जोड़ लेते हैं तो कहां आपमें कोई अशुद्धि रह जाती है और अशुद्धि है भी तो भगवान को उससे कोई मतलब नहीं रहता है। भक्त और भगवान अपने प्रेम में डूबे रहते हैं। यही भगवद् प्राप्ति का सुलभ मार्ग हैं जब तक आप किसी भी तिनके के समान बंधन में संसार से या शरीर से जुड़े हैं तब तक आप भगवद् प्राप्ति को पा नहीं सकते हैं। इसलिए सारे बंधनों में तोड़कर ही अपने ईष्ट की सेवा करें। यदि प्रभु नरक भी दें तो स्वीकार हो क्योंकि हम प्रभु की दी हुई चीज को बिना किसी नोंकझोंक के स्वीकार करना ही तो प्रेम है।

यहां एक बात और ध्यान रखें भक्त और भगवान दो नहीं होते हैं एक ही सत्ता दो हो के प्रेम लीला करती है। बस आपको अपने शरीर होने की स्थिति को छोड़ना पड़ता है और ये केवल अपने गुरू के आशीर्वाद और निरंतर भगवान नाम जाप से पाया जा सकता है।

 

ये विचार लेखक के अपने हैं आप अपने विचार और स्थिति के हिसाब से कर्म करें 

News Reporter

1 thought on “महिलायें पीरियड्स के दौरान भगवान् को भोग कैसे लगाएं?

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