मेरा सपना उत्तराखंड को ‘मशरूम स्टेट’ बनाना
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Mashroom lady- दिव्या रावत  की पूरी कहानी…

‘नौकरी खोजने की क्या जरूरत है, इच्छाशक्ति हो तो हम घर बैठे स्वरोजगार से अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं। मेरा काम तो एक बेहतर शुरुआत भर है। मेरा सपना उत्तराखंड को ‘मशरूम स्टेट’ बनाना है।’

किसी ज़माने में बेटियों का होना अच्छा नहीं माना जाता था, आज कई जगाओं पर बेटियों के होने पर परिवार वाले खुश नहीं होते. मगर जब बेटी बेटों से भी आगे जाके अपने माँ-बाप, शहर और देश का नाम ऊँचा करती है तो वो बेटी बेटो से भी बढ़ कर होती है. आज जिस समाज में हम जीते है वह बेटी का बाहर काम करना खास तौर पर खुद का बिज़नेस करना बहुत कठिन होता है . मगर कहते है न जो एक बार अपने लक्ष्य को पाने की ठान ले उसे कोई भी नहीं रोक सकता. उसी तरह कर दिखाया indian women Divya Rawat ने. जी हां आज हम एक ऐसे बेटी के बारे में बात करेंगे जिसने बेटो को कई कदम पीछे छोड़ अपने साथ साथ दूसरों के लिए काम करना शुरू किया.
हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड की दिव्या रावत की. दिव्या रावत ने अपने शहर उत्तरखं के साथ साथ पुरे देश का नाम रोशन किया हैं. दिव्या ने देश के कई अन्य राज्यों के युवाओं को पिछले साल २०१४ में मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग देना शुरू की. दिव्या के इस साहसिक कदम से सैकड़ों युवाओं एवं महिलाओं को आज रोजगार मिल रहा है।

उत्तराखंड के चमोली में रहने वाली दिव्या रावत आज मशरूम लेडी के नाम से जानी जाती है है। चमोली एक छोटा सा गांव है लेकिन दिव्या की मेहनत के कारण आज ये गांव पूरे देश भर में प्रसिद्ध है दिव्या रावत को आज के समय में उत्तराखंड की मशरुरम लेडी – Mushroom Lady के नाम से जाना जाता है।

चमोली एक छोटा गॉव होने के कारण यहाँ काम मिलना मुश्किल होता है इसलिए दिव्या दूर सहर में जाकर मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब कर रही थी लेकिन उसके दिल के कहीं किसी कोने में अपने छोटे से गांव चमोली की चिंता सताइये जा रही थी उसे तो बस अपने सहर चमोली को बड़ा करना था.


इसी सोच – विचार में दिव्या रावत ने अपनी जॉब छोड़ने का फैसला किया और उत्तराखंड लौट गई। दिव्या ने अपने घर वालो को बताया कि वो मशरुम की खेती करना चाहती है। परिवार वालों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। वो वापस दिल्ली लौट जाए लेकिन दिव्या अपना मन बना चुकी थी। दिव्या ने मात्र 30 हजार से अपना मशरुम की खेती का बिजनेस शुरु किया। और धीरे – धीरे दिव्या की मेहनत रंग लाने लगी। दिव्या ने 35 से 40 डिग्री तापमान में मशरुम उगाने से अपना बिजनेस शुरु किया। 35 डिग्री में मशरुम उगाना एक कारनामा ही है क्योंकि आमतौर पर मशरुम केवल 22 से 23 डिग्री के तापमान पर ही उगाए जाते है।

दिव्या के इस बिजनेस के कारण चमोली और आसपास के गांव की महिलाओं को रोजगार मिला और उनकी जिंदगी में भी सुधार आने लगा। दिव्या के अपने गांव में ही रोजगार लाने से उनके गांव के लोगों को अब काम की तलाश में कही बाहर जाने की जरुरत नहीं पड़ती.
आज दिव्या काम से चमोली ही नहीं बल्कि उसके आसपास के गाओं और शहर में लोगों को दूर दर्ज काम की तलाश में नहीं जाना पड़ता. दिव्या इस काम के वजह से मिली कामयाबी के लिए पहले उत्तराखंड सरकार द्वारा और उसके बाद विश्व महिला दिवस पर राष्ट्रपति द्वारा मशरुम क्रांति के लिए सम्मानित किया जा चुका है।

Indian women दिव्या रावत के अनुसार ये एक सिर्फ शुरुआत है उनका सपना तो उत्तराखंड को एक दिन मशरुम स्टेट बनाने का है।

News Reporter

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