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ड्रामा हो, या कोई उदास या कोई गम की मारी लड़की हर रोल में नूतन ऐसे फिट बैठती थी जैसे खुद उस रोल में अपनी ज़िंदगी को जी रही हो. फिल्म सीमा का रोल आप सबको याद होगा जिसमे एक भोली और मानसिक रूप से कमजोर लड़की का रोल नूतन जी के द्वारा इस तरह निभाया गया जैसे खुद नूतन की ज़िंदगी में सच में हो रहा हो. वैसे तो नूतन को एक्टिंग की कला उन्हें उनकी माँ शोभना समर्थ के द्वारा मिली है. जो की खुद एक जानी मानी कलाकार थी. नूतन का फ़िल्मी सफर स्कूल के समय से शुरू हो गया था. भारत में नूतन ही एक ऐसे कलाकार थी जिनको मिस इंडिया पुरूस्कार से सम्मानित किया जा चूका है. नूतन को बड़ी उपलब्धि 1958 में आई फिल्म 'सोने की चिड़िया' से मिली. जिसमे नूतन ने बलराज शाहनी के साथ एक बहतरीन रोल किया था. उसके बाद नूतन के ज़िंदगी में एक से बड़ कर एक फिल्मे आती गई,  जिनमे बंदनी, बारिश, सुजाता, मैं तुलसी तेरे आँगन की, मिलान, तेरे घर के सामने, पेइंग गेस्ट, खानदान, सरस्वतीचंद्र और भी कई ऐसी फिल्मे थी जिनको लोगो ने बहुत सराहा. नूतन की यादगार फिल्मों में 'सुजाता' एवं 'बंदिनी' का ख़ासतौर पर नाम लिया जाता है। नूतन बहल ने सिर्फ एक चुलबुली लड़की ही नहीं बल्कि आगे जाके माँ के रोल भी किये. फिल्म मेरी जंग, कर्मा, नाम में नूतन अनिल कपूर और संजय दत्त की माँ बनी. नूतन को गीत-गजल लिखने का बहुत शौक था. नूतन ने हिंदी सिनेमा के लगभग सारे बड़े कलाकारों के साथ काम किया जिनमे राजकपूर, देव आनन्द, संजीव कपूर, अशोक कुमार, दिलीप कुमार, और अमिताभ बच्चन आदि थे.

नूतन की पोती 'Pranuan' नूतन की हमशक्ल हैं

नूतन के परिवार की बात करे तो उनके एक बेटे मोहनीश बहल जिनका नाम बॉलीवुड के एक उम्दा कलाकारों में गिना जाता है. मोहनीश बहल की बेटी यानि नूतन की पोती प्रनुतन जो एक मॉडल और एक्ट्रेस हैं. बॉलीवुड के फेमस एक्ट्रेस तनुजा नूतन के सगी बहन हैं और भतीजी काजोल भी हिन्दी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्रियों में शामिल हैं। ये खूबसूरत अदाकार हमें फरवरी १९९१ को कैंसर की बीमारी के कारण छोड़ कर चली गई. मगर आज भी उनके उस अदाकारी को लोग याद करते हैं.

नूतन बहल के फेमस डायलॉग -

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संजीदा किरदारों के लिए मशहूर अदाकारा हैं नूतन
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यदि हम बॉलीवुड की नेचुरल ब्यूटी की बात करें तो हमारे दिमाग में एक ही एक्ट्रेस का चेहरे घूमने लगता है ‘Nutan Bahl’ का. अपने ज़माने की बेहद खूबसूरत और भोली मुस्कराहट वाली ये अदाकारा अपने आप में एक मिसाल थी. नूतन ने वो रोल तक किये हैं जिनको करने में आज की actresses के पसीने छूट जाते हैं.

संजीदा किरदारों के लिए मशहूर अदाकारा हैं नूतन 1

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ड्रामा हो, या कोई उदास या कोई गम की मारी लड़की हर रोल में नूतन ऐसे फिट बैठती थी जैसे खुद उस रोल में अपनी ज़िंदगी को जी रही हो. फिल्म सीमा का रोल आप सबको याद होगा जिसमे एक भोली और मानसिक रूप से कमजोर लड़की का रोल नूतन जी के द्वारा इस तरह निभाया गया जैसे खुद नूतन की ज़िंदगी में सच में हो रहा हो.

वैसे तो नूतन को एक्टिंग की कला उन्हें उनकी माँ शोभना समर्थ के द्वारा मिली है. जो की खुद एक जानी मानी कलाकार थी. नूतन का फ़िल्मी सफर स्कूल के समय से शुरू हो गया था. भारत में नूतन ही एक ऐसे कलाकार थी जिनको मिस इंडिया पुरूस्कार से सम्मानित किया जा चूका है.

नूतन को बड़ी उपलब्धि 1958 में आई फिल्म ‘सोने की चिड़िया’ से मिली. जिसमे नूतन ने बलराज शाहनी के साथ एक बहतरीन रोल किया था. उसके बाद नूतन के ज़िंदगी में एक से बड़ कर एक फिल्मे आती गई,  जिनमे बंदनी, बारिश, सुजाता, मैं तुलसी तेरे आँगन की, मिलान, तेरे घर के सामने, पेइंग गेस्ट, खानदान, सरस्वतीचंद्र और भी कई ऐसी फिल्मे थी जिनको लोगो ने बहुत सराहा. नूतन की यादगार फिल्मों में ‘सुजाता’ एवं ‘बंदिनी’ का ख़ासतौर पर नाम लिया जाता है।

संजीदा किरदारों के लिए मशहूर अदाकारा हैं नूतन 2

नूतन बहल ने सिर्फ एक चुलबुली लड़की ही नहीं बल्कि आगे जाके माँ के रोल भी किये. फिल्म मेरी जंग, कर्मा, नाम में नूतन अनिल कपूर और संजय दत्त की माँ बनी. नूतन को गीत-गजल लिखने का बहुत शौक था. नूतन ने हिंदी सिनेमा के लगभग सारे बड़े कलाकारों के साथ काम किया जिनमे राजकपूर, देव आनन्द, संजीव कपूर, अशोक कुमार, दिलीप कुमार, और अमिताभ बच्चन आदि थे.

नूतन की पोती ‘Pranuan’ नूतन की हमशक्ल हैं

नूतन के परिवार की बात करे तो उनके एक बेटे मोहनीश बहल जिनका नाम बॉलीवुड के एक उम्दा कलाकारों में गिना जाता है. मोहनीश बहल की बेटी यानि नूतन की पोती प्रनुतन जो एक मॉडल और एक्ट्रेस हैं. बॉलीवुड के फेमस एक्ट्रेस तनुजा नूतन के सगी बहन हैं और भतीजी काजोल भी हिन्दी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्रियों में शामिल हैं।

संजीदा किरदारों के लिए मशहूर अदाकारा हैं नूतन 3

ये खूबसूरत अदाकार हमें फरवरी १९९१ को कैंसर की बीमारी के कारण छोड़ कर चली गई. मगर आज भी उनके उस अदाकारी को लोग याद करते हैं.

नूतन बहल के फेमस डायलॉग –

  • औरत ज़िन्दगी में एक ही बार, एक ही मर्द को अपना कहती है – फिल्म बारिश
  • भगवान के प्रेम और विश्वास का एक ही सबूत है दुनिया में… जो माँ के दिल में ममता बनकर पलटा रहता है.. ‘सोने पे सुहागा’
  • ज़िन्दगी की कुछ बातें इतनी खूबसूरत होती है… जो वक़्त से पहले नहीं बताई जा सकती है – मैं तुलसी टेरर आँगन की. 

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