क्यों मनायी जाती है होली
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विष्णुपुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार दैत्यों के आदिपुरुष कश्यप और उनकी पत्नी दिति के दो पुत्र हुए। हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष। हिरण्यकशिपु ने कठिन तपस्या द्वारा ब्रह्मा को प्रसन्न करके यह वरदान प्राप्त कर लिया कि न वह किसी मनुष्य द्वारा मारा जा सकेगा न पशु द्वारा, न दिन में मारा जा सकेगा न रात में, न घर के अंदर न बाहर, न किसी अस्त्र के प्रहार से और न किसी शस्त्र के प्रहार से उसक प्राणों को कोई डर रहेगा। इस वरदान ने उसे अहंकारी बना दिया और वह अपने को अमर समझने लगा। उसने इंद्र का राज्य छीन लिया और तीनों लोकों को प्रताड़ित करने लगा। वह चाहता था कि सब लोग उसे ही भगवान मानें और उसकी पूजा करें। उसने अपने राज्य में विष्णु की पूजा को वर्जित कर दिया। उसने अपने दरबार में सभी को ये आदेश दे दिया की अब लोग सिर्फ उसी की पूजा करेंगे। जो उसकी पूजा नहीं करेगा वह मरेगा। पूरी पृथ्वी पर वह अपने आपको सबसे शक्तिशाली समझने लग गया और अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करने लगा।

पुत्र प्रहलाद का जन्म

एक समय ऐसा आया जब राजा के घर एक पुत्र का जन्म हुआ। राजा के पुत्र में एक खास बात निकली जिसको राजा ने कभी सोचा भी नहीं था। वो बात यह थी की उसका स्वयं का पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु जी का भक्त निकला। उसका पुत्र हमेशा भगवान विष्णु जी का जाप करता रहता था। उसका पुत्र प्रह्लाद सिवाय विष्णु भगवान के किसी अन्य को नहीं भजता.

पुत्र वध करने की साजिश

जब राजा ने देखा की उसका स्वयं का पुत्र ही उसकी पूजा ना करते हुए विष्णु जी की पूजा कर रहा है तो वह बहुत क्रोध में आ गया और उसने पहले तो अपने पुत्र को समझाया लेकिन उसके पुत्र के मना करने पर राजा ने अपने पुत्र का वध करने के निश्चय कर लिया। हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को मारने के लिए बहुत एस उपाय किये जैसे की सापों के तयखाने में बंद कर दिया गया, कभी हाथी के पैरो से कुचलवाने का प्रयास किया तो कभी पर्वत से निचे भी धकेल दिया गया। लेकिन जैसा की हमने आपको बताया की प्रहलाद विष्णु जी के परम भक्त थे इसलिए वो प्रहलाद को हर बार मौत के मुह से बचा लेते थे।

होलिका का निधन (होलिका दहन)

जब राजा के सभी तरीके विफल हो गए तब राजा की बहन “होलिका” ने राजा को कहा की उसे वरदान है वो आग में नहीं जल सकती इसलिए वह प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर चिता पर बैठ जाएगी बाद में हमारे सैनिक उस चिता में आग लगा देंगे इस से प्रहलाद की अवश्य ही मृत्यु हो जाएगी। होलिका प्रहलाद को लेकर अपनी गोद में बैठ गई और फिर उस चिता में आग लगा दी गई लेकिन उन्होंने जैसा सोचा था उस से उल्टा हुआ। होलिका जल कर मर गई लेकिन प्रहलाद सुरक्षित बाहर आ गया।

 

हिरण्यकश्यप का निधन

प्रहलाद को मारने के सारे प्रयास विफल होने के बाद स्वयं राजा ने उसे मारने की कोशिश की। तब भगवान विष्णु ने स्वयं नरसिंह का अवतार लिया और अपने नाखुनो से हिरण्यकश्यप का वध कर दिया।

नरसिंह अवतार

भगवान विष्णु ने जो रूप लिया था वो नरसिंह अवतार था नरसिंह मतलब नर + सिंह (“मानव-सिंह”) को पुराणों में भगवान विष्णु का अवतार माना गया है। जो आधे मानव एवं आधे सिंह के रूप में प्रकट होते हैं, जिनका सिर एवं धड तो मानव का था लेकिन चेहरा एवं पंजे सिंह की तरह थे वे भारत में, खासकर दक्षिण भारत में वैष्णव संप्रदाय के लोगों द्वारा एक देवता के रूप में पूजे जाते हैं जो विपत्ति के समय अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं।

News Reporter

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