अभिनय क्षेत्र - आशा के बारे में मीडिया में कभी अभद्र गॉसिप या स्केण्डल नहीं छपे। अलबत्ता आशा का साथ पाकर उनके नायकों की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सिल्वर तथा गोल्डन जुबिली मनाती रहीं। इसके बावजूद आशा को अभिनय के क्षेत्र में वह मान्यता तथा प्रतिष्ठा नहीं मिली जो नूतन, वहीदा रहमान, शर्मिला टैगौर अथवा वैजयंती माला को नसीब हुई थी।           फिल्मो में entry बचपन से आशा को डांस का शौक था। पड़ोस के घर में संगीत बजता, तो घर में उसके पैर थिरकने लगते थे। बाद में मां ने कथक नर्तक मोहनलाल पाण्डे से प्रशिक्षण दिलवाया। बड़ी होने पर पण्डित गोपीकृष्ण तथा पण्डित बिरजू महाराज से भरत नाट्यम में कुशलता प्राप्त की। निर्देशक बिमल रॉय ने 12 वर्ष की आयु में उन्हें फिल्म “बाप-बेटी” में लिया | इसे कुछ ख़ास सफलता प्राप्त नही हुयी | इसके अलावा उन्होंने ओर भी कई फिल्मो में बाल कलाकार की भूमिका निभाई | उन्होंने फ़िल्मी दुनिया में कदम रखते ही स्कूल जाना छोड़ दिया था | 16 वर्ष की आयु में उन्होंने दुबारा फ़िल्मी जगत में जाने का निर्णय किया लेकिन फिल्म “गूंज उठी शहनाई” के निर्देशक विजय भट्ट ने उनकी अभिनय प्रतिभा को नजरअंदाज करते हुए उन्हें फिल्म में लेने से इंकार कर दिया लेकिन अगले ही दिन फिल्म निर्माता सुबोध मुखर्जी और लेखक-निर्देशक नासिर हुसैन ने अपनी फिल्म “दिल देके देखो” में उन्हें शम्मी कपूर की नायिका बना दिया.   मशहूर सितारों के साथ आशा - शम्मी कपूर, राजेश खन्ना, मनोज कुमार, राजेंद्र कुमार, धर्मेन्द्र, जॉय मुखर्जी जैसे उस दौर के मशहूर सितारों के साथ आशा ने काम किया। शम्मी कपूर के साथ उनकी कैमिस्ट्री खूब जमी और फिल्म तीसरी मंजिल ने तो कमाल कर दिखाया। आशा की समकालीन अभिनेत्री नंदा, माला सिन्हा, सायरा बानो, साधना एक-एक कर गुमनामी के अंधेरे में खो गई, लेकिन आशा अपनी समाज सेवा तथा इतर कार्यों के कारण लगातार चर्चा में बनी रहीं।   नासीर हुसैन से प्यार करती थीं अभिनेत्री आशा पारेख अपनी पहली ही फिल्म से बाहर निकाले जाने पर आशा पारेख की मुलाकात उस दौर के मशहूर डायरेक्टर नासीर हुसैन से हुई. वो नासीर ही थे जिन्होंने आशा पारेख के भीतर छुपी हीरोइन को पहचान लिया और उन्हें फिल्म ‘दिल दे के देखो’ में अभिनेता शम्मी कपूर के साथ काम करने का मौका दिया. ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत कामयाब हुई और इसी फिल्म से बॉलीवुड में आशा पारेख का जादू चलने लगा. देखते ही देखते नासीर हुसैन की कई फिल्मों में आशा पारेख ने काम किया और इस दौरान दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए.     अवार्ड - वर्ष 1995 में अभिनय से निर्देशन में कदम रखने के बाद उन्होंने अभिनय नही किया | उन्हें “कटी पंतग” के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का “फिल्म फेयर अवार्ड (1970)” “पद्म अवार्ड (1992)” “लाइफ टाइम अचिएवेमेंट अवार्ड (2002)” में प्राप्त हुआ | इसके अतिरिक्त भारतीय फिल्मो में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें “अंतर्राष्ट्रीय भारतीय अकादमी सम्मान (2006)” भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंडल महासंघ द्वारा लिविंग लीजेंड सम्मान भी दिया गया |   प्रमुख फिल्में- दिल देके देखो, आए दिन बहार के, आन मिलो सजना, आया सावन झूम के, कटी पतंग, कारवां, दो बदन, घराना, लव इन टोकियो, मेरे सनम, फिर वहीं दिल लाया हूं, तीसरी मंजिल, जब प्यार किसी से होता है, प्यार का मौसम, मेरा गांव मेरा देश, साजन, जिद्दी, हीरा, मैं तुलसी तेरे आंगन की, पगला कहीं का इसके अलावा दो गुजराती, दो पंजाबी और एक कन्नाड़ फिल्म भी उन्होंने की है।"/>
मशहूर एक्ट्रेस आशा पारेख का जन्मदिन
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Indianwomenlife पर आज हम Aasha Parekh जी को उनके जन्मदिन पर याद कर रहे हैं. जिन्होंने अच्छे अभिनय के साथ साथ एक अच्छे इंसान होने का भी अपनी ज़िंदगी में रोल किया है.  तो आइये जानते है उनसे जुडी कुछ यादे. –

हिंदी सिनेमा में अपनी एक्टिंग और खूबसूरती से लाखों दिलों को जीतने वाली मशहूर अदाकारा आशा पारेख आज अपना 76वां जन्मदिन मना रही हैं। साल 1959 से लेकर 1973 तक आशा पारेख बॉलीवुड की टॉप अभिनेत्री रही हैं। आशा पारेख के न केवल अभिनय को बल्कि फिल्मों में उनके गानों को भी दर्शकों ने काफी पसंद किया है। बचपन से हिंदी सिनेमा की बारिकियों को अच्छी तरह से समझने के बावजूद एक अभिनेत्री के तौर पर अपनी खास पहचान बनाने के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा. उन्होंने हिंदी सिनेमा की एक मशहूर और कामयाब अभिनेत्री के तौर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई. हिंदी फिल्मों में खास योगदान के लिए आशा पारेख को कई पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है। साल 1992 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया।

 

अभिनय क्षेत्र –
आशा के बारे में मीडिया में कभी अभद्र गॉसिप या स्केण्डल नहीं छपे। अलबत्ता आशा का साथ पाकर उनके नायकों की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सिल्वर तथा गोल्डन जुबिली मनाती रहीं। इसके बावजूद आशा को अभिनय के क्षेत्र में वह मान्यता तथा प्रतिष्ठा नहीं मिली जो नूतन, वहीदा रहमान, शर्मिला टैगौर अथवा वैजयंती माला को नसीब हुई थी।

 

 

 

 

 

फिल्मो में entry
बचपन से आशा को डांस का शौक था। पड़ोस के घर में संगीत बजता, तो घर में उसके पैर थिरकने लगते थे। बाद में मां ने कथक नर्तक मोहनलाल पाण्डे से प्रशिक्षण दिलवाया। बड़ी होने पर पण्डित गोपीकृष्ण तथा पण्डित बिरजू महाराज से भरत नाट्यम में कुशलता प्राप्त की।
निर्देशक बिमल रॉय ने 12 वर्ष की आयु में उन्हें फिल्म “बाप-बेटी” में लिया | इसे कुछ ख़ास सफलता प्राप्त नही हुयी | इसके अलावा उन्होंने ओर भी कई फिल्मो में बाल कलाकार की भूमिका निभाई | उन्होंने फ़िल्मी दुनिया में कदम रखते ही स्कूल जाना छोड़ दिया था | 16 वर्ष की आयु में उन्होंने दुबारा फ़िल्मी जगत में जाने का निर्णय किया लेकिन फिल्म “गूंज उठी शहनाई” के निर्देशक विजय भट्ट ने उनकी अभिनय प्रतिभा को नजरअंदाज करते हुए उन्हें फिल्म में लेने से इंकार कर दिया लेकिन अगले ही दिन फिल्म निर्माता सुबोध मुखर्जी और लेखक-निर्देशक नासिर हुसैन ने अपनी फिल्म “दिल देके देखो” में उन्हें शम्मी कपूर की नायिका बना दिया.

 

मशहूर सितारों के साथ आशा –

शम्मी कपूर, राजेश खन्ना, मनोज कुमार, राजेंद्र कुमार, धर्मेन्द्र, जॉय मुखर्जी जैसे उस दौर के मशहूर सितारों के साथ आशा ने काम किया। शम्मी कपूर के साथ उनकी कैमिस्ट्री खूब जमी और फिल्म तीसरी मंजिल ने तो कमाल कर दिखाया।
आशा की समकालीन अभिनेत्री नंदा, माला सिन्हा, सायरा बानो, साधना एक-एक कर गुमनामी के अंधेरे में खो गई, लेकिन आशा अपनी समाज सेवा तथा इतर कार्यों के कारण लगातार चर्चा में बनी रहीं।

 

नासीर हुसैन से प्यार करती थीं अभिनेत्री आशा पारेख

अपनी पहली ही फिल्म से बाहर निकाले जाने पर आशा पारेख की मुलाकात उस दौर के मशहूर डायरेक्टर नासीर हुसैन से हुई. वो नासीर ही थे जिन्होंने आशा पारेख के भीतर छुपी हीरोइन को पहचान लिया और उन्हें फिल्म ‘दिल दे के देखो’ में अभिनेता शम्मी कपूर के साथ काम करने का मौका दिया.
ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत कामयाब हुई और इसी फिल्म से बॉलीवुड में आशा पारेख का जादू चलने लगा. देखते ही देखते नासीर हुसैन की कई फिल्मों में आशा पारेख ने काम किया और इस दौरान दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए.

 

 

अवार्ड –

वर्ष 1995 में अभिनय से निर्देशन में कदम रखने के बाद उन्होंने अभिनय नही किया | उन्हें “कटी पंतग” के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का “फिल्म फेयर अवार्ड (1970)” “पद्म अवार्ड (1992)” “लाइफ टाइम अचिएवेमेंट अवार्ड (2002)” में प्राप्त हुआ | इसके अतिरिक्त भारतीय फिल्मो में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें “अंतर्राष्ट्रीय भारतीय अकादमी सम्मान (2006)” भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंडल महासंघ द्वारा लिविंग लीजेंड सम्मान भी दिया गया |

 

प्रमुख फिल्में-

दिल देके देखो, आए दिन बहार के, आन मिलो सजना, आया सावन झूम के, कटी पतंग, कारवां, दो बदन, घराना, लव इन टोकियो, मेरे सनम, फिर वहीं दिल लाया हूं, तीसरी मंजिल, जब प्यार किसी से होता है, प्यार का मौसम, मेरा गांव मेरा देश, साजन, जिद्दी, हीरा, मैं तुलसी तेरे आंगन की, पगला कहीं का
इसके अलावा दो गुजराती, दो पंजाबी और एक कन्नाड़ फिल्म भी उन्होंने की है।

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