भावनात्मक दर्द से कैसे छुटकारा पाए
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How do I release emotional pain – हर व्यक्ति की भावनाएं अलग-अलग होती है उसकी सोच, उसके विचार, उसकी जीवनशैली ये सभी चीज़ें उसके भावना का निर्माण करती हैं.
अब सीधी सी बात है भावनाये अलग-अलग होंगी तो भावनात्मक दर्द भी अलग-अलग ही होंगे.  भावनात्मक दर्द निर्भर करता है आपके परिवेश पर, आपके रिश्तों पर, आपकी सोच पर.  शारीरिक दर्द भी कई बार भावनात्मक दर्द का कारण बनता है. इसलिए पूर्ण स्वस्थ होना भी जरुरी है.

भावनात्मक दर्द कैसे दूर करें – How to relieve emotional pain

यहाँ हम बात करेंगे कि एक व्यक्ति भावनात्मक दर्द से कैसे छुटकारा पा सकता है. जीवन में अगर किसी भी प्रकार का भावनात्मक दर्द है तो वो आपकी पूरी जीवन शैली को बदल कर रख देगा.

Emotional Pain release करने के लिए कुछ मुख्य बातें –

1. Emotional Pain को समझे –

यदि आपको किसी भी प्रकार कि feelings को चोट पहुंची है, आपको लगता है कि आपके साथ कुछ भी गलत हुआ है. तो उसका कारण को ढूंढें और उसको समझें. बाकि दर्द की तरह ही भावनात्मक दर्द हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है.इससे घवराने की जरुरत नहीं.

2. Be Honest पूरी ईमानदारी से जिए –

अपने और दूसरों के साथ पूरी ईमानदारी बरतें. किसी भी प्रकार का छल आपको और दूसरों को Emotional Pain दे सकता है. क्यूंकि यदि आपको खुद और दूसरों के साथ ईमानदार व्यव्हार रखेंगे तो आपको दूसरों का सपोर्ट मिलने की उम्मीद बनी रहेगी.

3. Be positive सकारात्मक रहें –

दूसरों के द्वारा बोली गई बात को नकरात्मक तरीके से न लें. किसी बात को सकारात्मक ढंग से सोचे. आपके रिस्तेदार और दोस्त आपके बारे में क्या सोचते हैं इसके लिए हमेशा सकारत्मक नजरिया रखें.

4. स्वीकार करना सीखें- 

हर परिस्थिति जो आपके विरुद्ध भी हो और जिसको आप बदल नहीं सकते ऐसी स्थिति को स्वीकार करना सीखे. उस स्थिति को पहले से ज्यादा प्यार करें. यदि आप ऐसा करते हैं तो आप अपनी विरोधी स्थिति को बदल सकते हैं.

5. बहस से बचें-

छोटी छोटी बातों में बहस से बचें. यदि आपका सामना किसी विरुद्ध परिस्थिति से हो रहा है तो आपको उस स्थिति को समझने के लिए समय निकाले और धैर्य से उसके बारें में विचार करें.

ये कुछ पांच विषय हैं जिनका जीवन में सही प्रबंधन करने से भावनात्मक दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है.

Emotional Pain को झेलना नहीं है न उससे लड़ना है. बल्कि धैर्य और समझदारी से उसके पीछे के कारण को समझना है.  आप इसके लिए किसी करीबी रिश्तेदार है या मनोचिकित्सक से मिल सकते हैं.भावनात्मक दर्द आपकी समझ को प्रभावित करता है इसलिए आपको धैर्य रखना जरुरी है. कोई जल्दबाजी आपकी बने-बनाये काम को बिगाड़ सकती है.

Emotional Pain और Physical Pain दोनों एक दूसरे से जुड़े रहते है. जीवन में दोनों में से किसी भी एक संतुलन विगड़ने से जीवन में चिरकाल तक दर्द बना रह सकता है. इसलिए सबधाणी रखें और खुश रहें.

News Reporter

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