बच्चों को डिप्रैशन से कैसे निकाले
Spread the love

How do you help a child with depression?- माँ-बाप के लिए उनके बच्चे ही उनकी ज़िंदगी होती है, यदि बच्चों को थोड़ा भी कुछ Negative नज़र आता है तो parents tension में आ जाते हैं.

Indian Parents हों या विदेशी पेरेंट्स, पेरेंट्स होते हैं. बच्चों का पूर्ण स्वस्थ रहना ही पेरेंट्स की सबसे बड़ी responsibility होती हैं. आज के समय में बच्चों का डिप्रेशन में आना सामान्य बात हो गई हैं, मगर ये डिप्रेशन पेरेंट्स को देर में समझ आता है.

कई पेरेंट्स बच्चों के डिप्रेसिव को उनका आलसीपन समझ लेते हैं, और उनकी इस गंभीर समस्या को नज़र अंदाज कर देते हैं,  यहाँ तक की पेरेंट्स अपने बच्चों को समझने लगते हैं, लम्बे-लम्बे लेक्चर देने लगते हैं. जिससे बच्चा और डिप्रेशन में चला जाता है.

बच्चों में depression के संकेत –

हम कैसे समझे की हमारा बच्चा depression में हैं ये depression problem जितनी छोटी नज़र आती है उतनी ही गंभीर भी हैं,  इस पर हमने कुछ बिंदुओं पर विचार किया जो मैं आपसे साझा करती है.

  • बच्चा यदि Anxiety, चिड़चिड़ा और झगड़ालू हो जाये.
  • जरा जरा सी बात पर नाराज़ होने लगे यहाँ तक की रोने लगे.
  • घर के खाने को इग्नोर करे और बहार के खाने को ज्यादा महत्त्व दे.
  • नींद कम हो जाये या समय से अधिक सोने लगे.
  • गुमसुम और उदास बना रहे.
  • बातें करने से कतराने लगे.
  • स्कूल या कोचिंग न जाने का बहाना करने लगे.
  • अपने home work पर ध्यान न दें.
  • स्कूल की कॉपी पर कुछ भी लिखने या बनाने लगे.

How to save children from depression

जैसे की ऊपर बताया है कि सर्वप्रथम तो child in depression का पता लगाना बहुत मुश्किल है और पता लग भी जाये तो उसे दूर करना भी उतना ही मुश्किल है.  मगर पेरेंट्स अपनी पूरी जिम्मेदारी से बच्चों को समझे और केयर करे तो इस गंभीर समस्या से निकला जा सकता है. इसके लिए यहाँ कुछ उपचार और सावधानी पर हम बात करते हैं. जैसे –

  • बच्चों कि feelings को पूरा response दें.
  • depressed child को बिलकुल फील न कराएं कि वो डिप्रेशन में हैं.
  • बच्चों कि बात को ज्यादा सुने और आपक कम बोलें.
  • उसकी किसी भी गलत बात को अचानक या एक दम इंकार या अस्वीकार न करें.
  • बच्चों पर चिल्लाएं न न ही डांटें.
  • उनको खेल कूद में व्यस्त रखें
  • किसी भी एक चीज़ पर जबरदस्ती बच्चों को न डालें.
  • बच्चों के सामने उनकी इस डिप्रेशन कि समस्या के बारे में बात न करें.
  • अपनी बच्चे को किसी अन्य बच्चे से compare न करे.
  • ज्यादा समस्या होने पर चिकित्सक के पास जाये मगर बच्चे को बिलकुल इस बारे में न बताएं.

जिस तरह बच्चे पेरेंट्स की लिए अहम् होते हैं उसी तरह बच्चों की लिए उनके माँ-बाप, इसलिए बच्चों को प्यार से धैर्य से संभाले, किसी भी जल्द बाजी में न रहे. हमेशा बच्चों को positive thinking दें न की negative, जिससे एक ख़ुशी परिवार बना रहें और बच्चे का भविष्य भी उज्जवल बने.

आकृति जैन, भोपाल

News Reporter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *