स्त्री की ज़िंदगी में सोलह श्रृंगार का महत्व
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Solah shringar in Women Life हिन्दू धर्म में सोलह श्रृंगार का एक खास महत्व है. सोलह श्रृंगार और खूबसूरती दोनों एक दूसरे के पूरक है. किसी एक की कमी आपको खालीपन दे सकती है.

Hindi dharma में सोलह श्रृंगार का धार्मिक महत्त्व के साथ-साथ वैज्ञानिक महत्त्व भी होता है.

एक आम विवाह के साथ-साथ फ़िल्मी विवाह में भी सोलह श्रृंगार को खास जगह दी जाती है.

कई बॉलीवुड एक्ट्रेसेस अपनी रियल शादी में भी सोलह श्रृंगार को अपनाया और अपनी खूबसूरती पर चार चाँद लगाए. दीपिका पादुकोणे हो या प्रियंका चौपड़ा, विपासा बासु हो या जेनेलिआ डिसूजा सभी ने अपनी शादी में सोलह श्रृंगार को बड़े महत्त्व के साथ स्वीकार किया.

Solah shringar वह उत्सव है

जहाँ हम सही मायने में एक नारी में परिवर्तित होकर हमारे ससुराल की लक्ष्मी बनकर उसकी शोभा बढ़ाते हैं।

बिंदी – आत्मा जो परमात्मा की बूँद है ब्रह्मांड गोलाकार, आत्मा का स्वरूप, बेठक है भ्रकुटी के मध्य, जहां लगाया जाता है. आदिकाल से ही नारी श्रृंगार का एक अभिन्न हिस्सा रही है. नारी चाहे जितना भी सजी धजी क्यों न हो बिंदी के बिना उसका श्रृंगार हमेशा अधूरा ही लगता है. बिंदी औरत के चेहरे को एक अलग रूप देती है और उन्हें सुन्दर दिखाती है|

सिंदूर – सिंदूर किसी भी शादी शुदा महिला के लिए उसके सुहागन होने का प्रतीक माना जाता है। शरीर रचना के अनुसार महिलाओं के माँग का स्थान जहाँ सिंदूर लगाया जाता है वह अधिक कोमल और संवेदनशील होता है. सिंदूर में पारा धातु पाया जाता है जो सर को ठंढक देती है । सिंदूर लग जाने के बाद एक लड़की अपने माता पिता के घर को छोड़कर अपने पति की हो जाती है और उसकी सारी दुनिया ही बदल जाती है। “अपने पति के नाम का सिंदूर सारी ज़िन्दगी लगाती है और सदा सुहागन रहने की कामना करती हैं.

माँग भरना – मांग में सिंदूर सजाना सुहागिन स्त्रियों का प्रतीक माना जाता है,यह जहां मंगलदायी माना जाता है.

काजल – आंखों को सुंदर दिखने के लिए काजल बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आँखों में होने वाली कई तरह की बीमारियों से यह बचाता है। मोतियाबिंद, रतौंधी इत्यादि में कारगर है। काजल लगाने से आँखों को ठंडक मिलती है और आराम पहुंचता है।

नथ – यह बांए नथुने में पहना जाने वाला एक आभूषण है| ये एक आठवां श्रृंगार है.

मंगलसूत्र – विवाह के अन्य रस्मों के साथ मंगलसूत्र पहनना भी एक मुख्य रस्म बन गया है , जो वर पक्ष द्वारा लाया जाता है और मंत्रोचारण के बीच वधु को पहनाया जाता है.

कान के कुंडल – ये श्रृंगार सोलह श्रृंगार में सबसे अहम् माना जाता है. इसके लिए कानो को छिदवाना पड़ता है जो कि स्वस्थ की दृष्टि से लाभदायक होता है.

मेहंदी – मेहंदी एक बहुत ही शक्तिशाली औषधीय जड़ीबूटी है। मेहंदी हाथों और पैरों पर लगाई जाती है, जो शरीर में तंत्रिका समापन रखता हैं.

चूड़ियां – यह नारी के हाथ का प्रमुख अलंकरण है, जब शादी तय होती है तो उस औरत के स्वास्थ्य कि जवाबदारी लेते ससुराल से चूड़ी बाली पायल और नथ दी जाती है और शादी के दिन मंगल सूत्र ताकि कोई श्वसन रोग भी ना हो.

बाजूबंद – बाँहों में सोने या चंडी के कड़े को बाजूबंद कहा जाता है. इसका धातु स्वस्थ के लिए फायदेमंद होता है.

लाल कपडे – शादी के समय पहने जाने वाले परिधानों में चोली, ओढ़नी और घाघरा लाल रंग होता है. जो एक वैवाहिक स्त्री की एक खास पहचान है.

गजरा – Flowers से बने एक प्रकार का गुच्छा गजरा कहलाता है. ये खुशबू से भरा होता है.

कमरबंद – नाम से ही प्रतीत होता है कि इसे कमर में पहना जाता है. ये भी सोने या चांदी के बने होते है.

पायल -बिछिया – आमतौर पर बिछिया पैर की तर्जनी पर पहनी जाती हैं। यहां से एक विशेष तंत्रिका गर्भाशय को जोड़ती है और दिल से गुजरती है। यहाँ बिछिया पहनना गर्भाशय को मजबूत करता है। यह रक्त प्रवाह को विनियमित करके इसे स्वस्थ रखता हैं और मासिक धर्म चक्र नियंत्रित करता हैं ।

अंगूठी – वैसे तो सदियों से विवाह के अलावा अंगूठी को पहना जाता है. लेकिन विवाह के सोलह श्रृंगार में एक विशेष स्थान लिए होता है.

टीका – वैवाहिक स्त्री के माथे पर लगा एक विशेष प्रकार का चिन्ह लिए होता है. ये सोने और चांदी का आभूषण होता है.

News Reporter

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