बच्चे का कम वजन (poor weight gain of baby) होना तो माँ-बाप के लिए चिंता का विषय है , क्यूंकि बच्चे का कम वजन होने से बच्चे को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

आमतौर पर जन्म के समय सामान्य बच्चे का वजन ढाई किलो से लेकर साढ़े तीन किलो तक होता है, लेकिन प्री-मेच्योर बच्चे का वजन दो किलो या उससे कम भी हो सकता है। ऐसे बच्चे को डॉक्टर की निगरानी और विशेष देखभाल की जरूरत होती है। उन्हें जन्म के लगभग दो सप्ताह बाद ही अस्पताल से घर ले जाने की इजाजत मिलती है। डॉक्टरों की देख-रेख में बच्चा सेहतमंद हो जाता है।

कम वजन वाले बच्चे को खास देखभाल की जरूरत होती है, क्योंकि ऐसे बच्चे की रोग प्रतिरोधी क्षमता बहुत कम होती है। कमजोर रोग प्रतिरोधी क्षमता के कारण उन्हें अलग-अलग तरह की संक्रामक बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है। अगर बच्चा किसी संक्रामक बीमारी से ग्रसित हो जाये तो स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

नवजात बच्चे का वजन 2.5 kg से 4 kg के लगभग सही माना जाता है। अगर जन्म के समय बच्चे का वजन 2.5 kg से कम वजन का होता है तो इसका मतलब शिशु कमजोर है और उसे देखभाल की आवश्यकता है। आप के बच्चे का वजन 2.5 kg से कम है तो अपने डॉक्टर से संपर्क बनाये रखें। आप हर यथा संभव कोशिश करें की आप का बच्चा बीमार न पड़े। जिन बच्चों का वजन जन्म के समय 2 kg से कम होता है उन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।

सबसे पहले जानते हैं की बच्चे का औसत वजन कितना होना चाहिए :-

शिशु की उम्र महीनो में

कम वजन जन्मे प्री-मेच्योर नवजात बच्चों के लिए तो माँ का दूध मानो अमृत तुल्य है। माँ के दूध से बच्चे के शरीर को एंटीबाडी मिलता है। एंटीबाडी एक तरह का प्रोटीन है जो बच्चे के शरीर में पनप रहे संक्रमण को मार भगाता है। चूँकि बच्चे का immune system पूरी तरह विकसित नहीं है इसलिए वो खुद antibody नहीं बना पता है। मगर जैसे जैसे बच्चा बड़ा होगा उसका immune system पूरी तरह विकसित हो जायेगा और तब उसका शरीर खुद ही संक्रमण से लड़ने में सक्षम हो जायेगा। यानि पहले छह महीने कम वजन बच्चे को जितना हो सके अपना स्तनपान कराएं। यह उसके लिए आहार भी है और दवा भी।

 

कम वजन - प्री-मेच्योर शिशु का वजन इस तरह बढ़ाएं

  1. जन्म के बाद बच्चे को माँ के संपर्क में रखें। माँ की त्वचा के संपर्क में रहने से बच्चे के शरीर का तापमान नियंत्रित रहेगा।
  2. मौसम के अनुसार बच्चे को कपडे पहनाये। ठण्ड में बच्चे को अच्छी तरह ढक के रखें। बच्चे को ऊनि कपडे पहनाये। गर्मियों में बच्चे को सूती कपडे पहनाये।
  3. गर्मियों में बच्चे को ऐसे कमरे में रखें जो बाकि कमरों के मुकाबले ठंडा हो।
  4. बच्चे को एक पल के लिए भी बिना कपडे के ना रखें।
  5. ठण्ड में बच्चे को ऐसे कमरे में रखें जो बाकि कमरों से गर्म हो। कमरे की खिड़कियों को बंद रखें ताकि बहार से ठण्ड हवा अंदर न आये।
  6. बिना डॉक्टर से पूछे बच्चे को नेहलाये नहीं। जब तक आप का बच्चा एक साल का न हो जाये या फिर उसका वजन सामान्य बच्चों के जितना न हो जाये, उसे नहलाएं नहीं। क्योँकि आप का बच्चा खुद से अपना शारीरिक तापमान नियंत्रित करने में अभी असमर्थ है। सप्ताह में एक बार, बच्चे को रुई के पोहे से या साफ सूती कपडे को भीगा कर उससे बच्चे के शरीर को पोछ कर साफ करें।

अन्य उपाय -

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नवजात शिशु के वजन बढ़ाने के क्या तरीके हैं?
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बच्चे का कम वजन (poor weight gain of baby) होना तो माँ-बाप के लिए चिंता का विषय है , क्यूंकि बच्चे का कम वजन होने से बच्चे को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

आमतौर पर जन्म के समय सामान्य बच्चे का वजन ढाई किलो से लेकर साढ़े तीन किलो तक होता है, लेकिन प्री-मेच्योर बच्चे का वजन दो किलो या उससे कम भी हो सकता है। ऐसे बच्चे को डॉक्टर की निगरानी और विशेष देखभाल की जरूरत होती है। उन्हें जन्म के लगभग दो सप्ताह बाद ही अस्पताल से घर ले जाने की इजाजत मिलती है। डॉक्टरों की देख-रेख में बच्चा सेहतमंद हो जाता है।

कम वजन वाले बच्चे को खास देखभाल की जरूरत होती है, क्योंकि ऐसे बच्चे की रोग प्रतिरोधी क्षमता बहुत कम होती है। कमजोर रोग प्रतिरोधी क्षमता के कारण उन्हें अलग-अलग तरह की संक्रामक बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है। अगर बच्चा किसी संक्रामक बीमारी से ग्रसित हो जाये तो स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

नवजात बच्चे का वजन 2.5 kg से 4 kg के लगभग सही माना जाता है। अगर जन्म के समय बच्चे का वजन 2.5 kg से कम वजन का होता है तो इसका मतलब शिशु कमजोर है और उसे देखभाल की आवश्यकता है। आप के बच्चे का वजन 2.5 kg से कम है तो अपने डॉक्टर से संपर्क बनाये रखें। आप हर यथा संभव कोशिश करें की आप का बच्चा बीमार न पड़े। जिन बच्चों का वजन जन्म के समय 2 kg से कम होता है उन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।

सबसे पहले जानते हैं की बच्चे का औसत वजन कितना होना चाहिए :-

शिशु की उम्र महीनो में

  • नवजात शिशु – 3.3
  • 1 महिना – 3.5-4.4
  • 2 महिना – 4.7-5.4
  • 3 महिना – 5.6-6.2
  • 4 महिना – 7 6.3
  • 5 महिना – 7.3 6.9
  • 6 महिना – 7.9 7
  • 7 महिना – 8.2 7.1
  • 8 महिना – 8.6 7.66
  • 9 महिना – 8.8 8.1
  • 10 महिना – 9.1 8.2
  • 11 महिना – 9.2 8.3
  • 12 महिना – 9 8

नवजात शिशु के वजन बढ़ाने के क्या तरीके हैं? 1

कम वजन जन्मे प्री-मेच्योर नवजात बच्चों के लिए तो माँ का दूध मानो अमृत तुल्य है। माँ के दूध से बच्चे के शरीर को एंटीबाडी मिलता है। एंटीबाडी एक तरह का प्रोटीन है जो बच्चे के शरीर में पनप रहे संक्रमण को मार भगाता है। चूँकि बच्चे का immune system पूरी तरह विकसित नहीं है इसलिए वो खुद antibody नहीं बना पता है। मगर जैसे जैसे बच्चा बड़ा होगा उसका immune system पूरी तरह विकसित हो जायेगा और तब उसका शरीर खुद ही संक्रमण से लड़ने में सक्षम हो जायेगा। यानि पहले छह महीने कम वजन बच्चे को जितना हो सके अपना स्तनपान कराएं। यह उसके लिए आहार भी है और दवा भी।

 

कम वजन – प्री-मेच्योर शिशु का वजन इस तरह बढ़ाएं

  1. जन्म के बाद बच्चे को माँ के संपर्क में रखें। माँ की त्वचा के संपर्क में रहने से बच्चे के शरीर का तापमान नियंत्रित रहेगा।
  2. मौसम के अनुसार बच्चे को कपडे पहनाये। ठण्ड में बच्चे को अच्छी तरह ढक के रखें। बच्चे को ऊनि कपडे पहनाये। गर्मियों में बच्चे को सूती कपडे पहनाये।
  3. गर्मियों में बच्चे को ऐसे कमरे में रखें जो बाकि कमरों के मुकाबले ठंडा हो।
  4. बच्चे को एक पल के लिए भी बिना कपडे के ना रखें।
  5. ठण्ड में बच्चे को ऐसे कमरे में रखें जो बाकि कमरों से गर्म हो। कमरे की खिड़कियों को बंद रखें ताकि बहार से ठण्ड हवा अंदर न आये।
  6. बिना डॉक्टर से पूछे बच्चे को नेहलाये नहीं। जब तक आप का बच्चा एक साल का न हो जाये या फिर उसका वजन सामान्य बच्चों के जितना न हो जाये, उसे नहलाएं नहीं। क्योँकि आप का बच्चा खुद से अपना शारीरिक तापमान नियंत्रित करने में अभी असमर्थ है। सप्ताह में एक बार, बच्चे को रुई के पोहे से या साफ सूती कपडे को भीगा कर उससे बच्चे के शरीर को पोछ कर साफ करें।
नवजात शिशु के वजन बढ़ाने के क्या तरीके हैं? 2

अन्य उपाय –

  • जन्म के बाद बच्चे को मां के संपर्क में रखा जाए। मां की त्वचा के स्पर्श से बच्चे के शरीर का तापमान संतुलित रहेगा।
  • नवजात बच्चे और मां दोनों को मौसम के अनुकूल कपड़े से ढककर रखा जाए। इसके लिए गर्मियों में सूती और सर्दियों में ऊनी कपड़ों का इस्तेमाल करें।
  • बच्चे को ऐसे कमरे में ना रखें जहां खिड़कियां और दरवाजे खुले हों।
  • जिस कमरे में बच्चे को रखा जाए, वह गर्म होना चाहिए।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चे को नहलाएं नहीं।
  • इस बात का खासतौर पर ध्यान रखें कि बच्चे का सिर ढका हो।
  • बच्चे को बिना कपड़ों के थोड़ी देर भी न रखें।

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