इसी तरह एक किस्सा विंस्टन चर्चिल का उद्धरण कश्मीर घाटी की पहली महिला व्हीलचेयर से चलने वाली बास्केटबॉल खिलाड़ी इंशा बशीर के जीवन से जुड़ा है। इंशा जो हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर बडगाम जिले के बीरवाह इलाके से आई हैं। इंशा जब सिर्फ 15 साल की थीं तभी उनका एक्सिडेंट हो गया था। इस हादसे में उनके स्पाइनल में गहरी चोटें आईं। इस हादसे के एक साल पहले ही उन्हें पेट के अल्सर की शिकायत हुई थी। इसकी वजह से उन्हें खांसी के वक्त खून आता था। कश्मीर के बडगाम जिले की रहने वाली इंशाह को सही वक्त पर इलाज नहीं मिल पाया। वे बताती हैं, 'मैं उस वक्त 12वीं में थी जब ये हादसा हुआ था। रीढ़ की हड्डी में चोट की वजह से मुझे व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा। बडगाम में चिकित्सा सुविधाओं के आभाव में मेरे परिवार को भी कष्ट सहना पड़ा।' इंशा 10 वीं कक्षा में थी जब वह 2008 में अपने ही निर्माणाधीन घर से गिर गई थी और गिरने के प्रभाव के कारण उसने चलने की क्षमता खो दी थी। उसके दर्द और अवसाद की भावनाओं पर काबू पाने के बाद इंशा स्वैच्छिक मेडिकेयर सोसाइटी नामक एक गैर सरकारी संगठन में शामिल हो गईं, उन्हें बास्केटबॉल में गहरी दिलचस्पी थी और समय के साथ 2017 में हैदराबाद में होने वाली राष्ट्रीय चैम्पियनशिप के लिए योग्य हो गई। अब, इंशा एक विशेष प्रशिक्षण में प्रशिक्षण जारी रखती है विशेष रूप से विकलांग बच्चों के लिए शिविर स्थापित किया गया संघर्ष के आठ सालों के बाद इंशाह को अमेरिका द्वारा स्पोर्ट्स विजिटर प्रोग्राम में शिरकत के लिए नॉर्थ कैरोलिना में आमंत्रित किया गया। यह उनके लिए बेहद खुशी और भावुक कर देने का क्षण था। आपको बता दें कि आम खिलाड़ियों की तरह इंशाह भी हर रोज जिम जाती हैं। इंशाह अपनी जिंदगी से चलकर भारत की लड़कियों को स्पोर्ट्स में आने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।"/>
कड़े होंसलो से दी जाती है चुनौतियों को मात – इंशा बशीर
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हमारे आस पास न जाने कितने ऐसे लोग मिल जाएंगे जो विपरीत परिस्थितियों में भी चुनौतियों को मात देकर सबके लिए प्रेरणास्रोत बन जाते हैं।
आपने एक कहावत सुनी होगी “सफलता अंतिम नहीं है, विफलता घातक नहीं है” इसी तरह एक किस्सा विंस्टन चर्चिल का उद्धरण कश्मीर घाटी की पहली महिला व्हीलचेयर से चलने वाली बास्केटबॉल खिलाड़ी इंशा बशीर के जीवन से जुड़ा है। इंशा जो हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर बडगाम जिले के बीरवाह इलाके से आई हैं।

इंशा जब सिर्फ 15 साल की थीं तभी उनका एक्सिडेंट हो गया था। इस हादसे में उनके स्पाइनल में गहरी चोटें आईं। इस हादसे के एक साल पहले ही उन्हें पेट के अल्सर की शिकायत हुई थी। इसकी वजह से उन्हें खांसी के वक्त खून आता था। कश्मीर के बडगाम जिले की रहने वाली इंशाह को सही वक्त पर इलाज नहीं मिल पाया। वे बताती हैं, ‘मैं उस वक्त 12वीं में थी जब ये हादसा हुआ था। रीढ़ की हड्डी में चोट की वजह से मुझे व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा। बडगाम में चिकित्सा सुविधाओं के आभाव में मेरे परिवार को भी कष्ट सहना पड़ा।’

इंशा 10 वीं कक्षा में थी जब वह 2008 में अपने ही निर्माणाधीन घर से गिर गई थी और गिरने के प्रभाव के कारण उसने चलने की क्षमता खो दी थी। उसके दर्द और अवसाद की भावनाओं पर काबू पाने के बाद इंशा स्वैच्छिक मेडिकेयर सोसाइटी नामक एक गैर सरकारी संगठन में शामिल हो गईं, उन्हें बास्केटबॉल में गहरी दिलचस्पी थी और समय के साथ 2017 में हैदराबाद में होने वाली राष्ट्रीय चैम्पियनशिप के लिए योग्य हो गई।

अब, इंशा एक विशेष प्रशिक्षण में प्रशिक्षण जारी रखती है विशेष रूप से विकलांग बच्चों के लिए शिविर स्थापित किया गया
संघर्ष के आठ सालों के बाद इंशाह को अमेरिका द्वारा स्पोर्ट्स विजिटर प्रोग्राम में शिरकत के लिए नॉर्थ कैरोलिना में आमंत्रित किया गया। यह उनके लिए बेहद खुशी और भावुक कर देने का क्षण था। आपको बता दें कि आम खिलाड़ियों की तरह इंशाह भी हर रोज जिम जाती हैं। इंशाह अपनी जिंदगी से चलकर भारत की लड़कियों को स्पोर्ट्स में आने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।

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