एक मिसाल ज्योति कुमारी
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ज्योति बनी बाप के लिए तारनहार

जिस बेटी को एक बाप अपने से दूर शादी करके पराये घर भेज देता है और फिर साडी जिम्मेदारी उसके पति पर यानि अपने दामाद पर ही छोड़ देता है. वही बेटी उसके लिए उसकी जीवनदायनी बन गई. हम जिसकी बात कर रहे हैं. उसकी बात आज हर चेंनेल और हर अख़बार पर हो रही है. जी हाँ हम बात कर रहे हैं बिहार के एक छोटे से गांव की बेटी दरभंगा के ज्योति कुमारी की.

ज्योति की चर्चा आज देश ही नहीं विदेश में भी हर जगह हो रही है। सिरहुल्ली गांव की ये ज्योति लॉकडाउन में पिता को लेकर साइकिल से गुरुग्राम से दरभंगा पहुंच गई। 1200 किमी के इस संघर्षपूर्ण सफर को किन परेशानी में पूरा किया ये वो ही जानती है. मगर उन्हें कोई भी परेशानी अपने लक्ष्य से दूर नहीं कर सकी.

ज्योति की इमोशनल कहानी सिर्फ कहानी नहीं है उसकी ये कहानी उसी की साइकिल के पहिये की तरह घूमती एक एक चक्कर की तरह उसके होंसला और हिम्मत की कहानी को बताता है.

ज्योति कोई मजबूत शरीर वाली या कोई साइकिल को दौड़ने वाली कोई खिलाडी या चैम्पियन नहीं थी जो साइकिल को उठा का बस यूँ ही १२०० किलोमीटर पहुँच जाती. ज्योति तो अन्य साधारण लड़कियों की तरह मात्र 15 साल की एक नाजुक लड़की थी. मगर जितना नाजुक उसका शरीर था उतने ही मजबूत उसके होंसले थे.

शायद ही कोई बेटी होगी जो इस तरह अपने पिता को लेकर गर्मी की ताप्ती धुप में एक-एक पहिया घुमाते हुए अपने गांव तक पहुँचती. मगर ज्योति आज देश की ही नहीं बल्कि सारे विश्व की सिख बन गई .

ज्योति अपने घायल पिता पिता मोहन पासवान को अपनी पुरानी सी साइकिल पर बैठाकर दिल्ली से दरभंगा पहुंच गई। ज्योति की इस हिम्मत को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इवांका ने उन्हें ट्विटर पर ये कहते हुए सराहा कि – ट्वीट किया, ’15 साल की ज्योति कुमारी ने अपने जख्मी पिता को साइकिल से सात दिनों में 1,200 किमी दूरी तय करके अपने गांव ले गई। यह भारतीयों की सहनशीलता और उनके अगाध प्रेम की भावना का परिचायक है। भारतीय साइकिलिंग महासंघ ने उनके टैलेंट का परखते हुए बड़ा ऑफर दिया है। असोसिएशन चाहता है कि वह दिल्ली आएं और ट्रायल दें.

ज्योति की कहानी – Jyoti’s Emotional story

Coronavirus के कारण होने वाले lockdown के इस मजबूर वक्त में देशभर के प्रवासी मजदूर अपनी कर्मभूमि को छोड़कर अपने गांवों की तरफ लौटने को बेबस हैं, ऐसे में ज्योति ने भी एक ऐसा साहसी कदम उठाया जिसे देख-सुनकर हर कोई हतप्रभ है। ज्योति के पिता मोहन पासवान कुछ महीने पहले एक हादसे में जख्मी हो गए थे, इसलिए वो अपने दम पर घर पहुंचने में असमर्थ थे।

लॉकडाउन में पिता के फंसे होने से बेटी ज्योति परेशान हो गई और एक दिन खुद ही साइकिल उठाकर पिता को पीछे बिठाकर 1200+ किलोमीटर के एक कठिन सफर पर निकल पड़ी। ज्योति ने बताया कि उसने पापा को साइकिल पर बिठाकर 10 मई को गुरुग्राम से चलना शुरू किया और 16 मई की शाम घर दरभंगा पहुंच गई। रास्ते में उसे बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा, हालांकि कुछ लोगों ने उनकी मदद भी की। ज्योति ने 7दिनों में ही पिता को साइकिल के पीछे बिठाकर 1200 किलोमीटर का रास्ता नाप दिया.

News Reporter

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