लिव-इन रिलेशनशिप के लाभ और नुक्सान
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लिव-इन रिलेशनशिप एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें दो लोग जिनका विवाह नहीं हुआ है, साथ रहते हैं और एक पति-पत्नी की तरह आपस में शारिरिक सम्बन्ध बनाते हैं।

लिव इन रिलेशनशिप अब एक बढ़ता हुआ ट्रेंड बन गया है पर इसके बावजूद इसे सामाजिक स्‍वीकृति प्राप्‍त नहीं हे और इसके लिए एक टैबू बना हुआ है। खास कर बुजुर्ग लोग इसे काफी हेय दृष्‍टि से देखते हैं। लिव-इन रिलेशनशिप में जोड़े जो काफी समय तक एक दूसरे के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में है, वह शादी के बाद कुछ भी नया महसूस नहीं कर पाते और यह नयापन महसूस ना कर पाना एक दूसरे से दूर होने के लिए कारण बन सकता है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मुक़दमे में अपने निर्णय में इस समबध के बारे में यह सुनाया कि “‘लिव-इन सम्बन्ध’ एक चले-आओ चले-जाओ सम्बंध है। इस सम्बंध से कोई बंदिश तय नहीं होती और न ही यह सम्बंध दोनों पक्षों में को क़ानूनी रिश्ता बनाता है।

लिव-इन रिलेशनशिप के लाभ

आपके पैसे बचते हैं

लिव इन रिलेशनशिप में दोनों के एक साथ रहने से दोनों की समस्यायें हल हो जाती है। घर के किराये से लेकर आने जाने का खर्च और समय काफी बच जाता है।

ढेर सारा सेक्‍स मिलता है

लिव इन के इस रिश्ते दोनों एक दूसरे के नजदीक रहते है। जिससे सेक्‍स करने के लिए तरसना नहीं पड़ता क्‍योंकि एक ही छत पर रहने से यह कमी भी भरपूर तरीके से पूरी हो जाती है।

 

साथी से अलग होने में दिक्‍कत नहीं

लिव इन रिलेशनशिप में काफी समय तक एक दूसरे के साथ रहने के बाद, यदि आपके बीच होने वाले आपसी झगडे के चलते आप अलग होना चाहते है, तो आप बिना किसी कागजी कारवाही के अलग हो सकते है। इसके लिए आपको खुली अजादी होती है। अलग रहने के लिए आपको किसी कानूनी कार्यवाही को करने की जरूरत नहीं पड़ती है।

 

अन्य लाभ

  1. साथी को पूर्ण समय मौजूद होने के कारण जानने में आसानी होती है।
  2. दोनो पक्ष आम तौर से आर्थिक रूप से स्वतंत्र और किसी पर निर्भर नहीं होते।
  3. इस रिश्ते में सामाजिक और पारिवारिक नियम लागू नहीं होते।
  4. वैवाहित जीवन की जवाबदारी इस रिश्ते पर लागू नहीं होती।
  5. हर पक्ष दूसरे का सम्मान करता है।
  6. सम्बन्ध के समाप्त होने पर तलाक जैसे झंजट-भरे मुकदमे कम ही देखे गए हैं।

लिव-इन रिलेशनशिप के कुछ नुक्सान

किसी भी आर्थिक, सामाजिक और कानूनी जिम्‍मेदारी से आजाद ये रिश्‍ता लोगों को बड़ा आसान भी लगता है। जहां अगर कमिटमेंट ना हो तो कोई भी एक पक्ष दूसरे को आहत और हतप्रभ छोड़ कर आसानी से आगे बढ़ जाता है। सबकि शादी में कितने भी मतभेद के बाद रिश्‍ता तोड़ने की जटिल प्रक्रिया किसी को आसानी से छोड़ कर चल देने का मौका नहीं देती।

सबसे ज्‍यादा नुकसान महिलाओं को

लिव इन रिलेशन शिप में सबसे ज्‍यादा नुकसान में महिलायें ही रहती हैं क्‍योंकि आज भी हमारा समाज पुरुष प्रधान है। ऐसे में अगर लिव इन रिलेशनशिप से एक पुरुष पार्टनर निकल कर चला जाता है तो महिला को सामाजिक प्रताड़ना तो सहनी ही पड़ती है दूसरा साथी मिलना भी आसान नहीं होता।

बच्‍चों पर नकरात्‍मक प्रभाव –

लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के बच्‍चों पर सबसे ज्‍यादा नकरात्‍मक प्रभाव पड़ता है। वे बेहद असुरक्षित महसूस करते हैं और उनमें अविश्‍वास की भावना घर कर जाती है। अगर उनके माता पिता अलग हो जाते हैं तो उनकी सामाजिक स्‍थिति भी खासी विचित्र हो जाती है।

लिव-इन रिलेशनशिप में असुविधाएँ

  • समाज की अस्वीकृति और तिरस्कार
  • सम्बंध का विवाह की तरह टिकाव न होना
  • स्त्रियों की समस्याएँ, विशेष रूप से सम्बंध अचानक टूटने की स्थिति में पुरुषों से अधिक होती हैं
  • इस सम्बंध से पैदा होने वाले बच्चे पारम्परिक पारिवारिक मर्यादाओं को समझने और अपनाने में असमर्थ होते हैं

News Reporter

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