भारतीय महिला मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम ने विश्व महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में छठी बार स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रच दिया. 48 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में यूक्रेन की हना ओखोता को 5-0 से हराया। 3 बच्चों की मां मैरीकॉम ने जीत के बाद जैसे ही तिरंगा उठाया उनके आंसू छलक गए।

  अब तक के पदक जितने वालों मुक्केबाज में मैरीकॉम विश्व चैम्पियनशिप में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाली मुक्केबाज भी बनीं। उन्होंने छह स्वर्ण और एक रजत जीतकर क्यूबा के फेलिक्स सेवोन (91 किलोग्राम भारवर्ग) की बराबरी की। फेलिक्स ने 1986 से 1999 के बीच छह स्वर्ण और एक रजत पदक जीता था।

तिरंगा उठाते ही छलके आंसू

जीत के बाद मैरीकॉम ने कहा, 'यह मेरे लिए बहुत मुश्किल समय रहा। मगर आप लोगों के प्यार ने ये काम भी संभव कर दिखाया । हालाँकि मैं वेट कैटेगरी से संतुष्ट नहीं थी। 51 किग्रा कैटेगरी ओलिंपिक में मेरे लिए मुश्किल होगा, लेकिन मैं खुश हूं। मैं इस जीत के लिए अपने सभी फेन्स को धन्यवाद देना चाहती हूँ । मैं आप सभी की तहेदिल से शुक्रगुजार हूं। यह जीत में अपने देश को समर्पित करती हूँ । हना से मुकाबले के बारे में उन्होंने कहा कि यूक्रेनी खिलाड़ी के खिलाफ मैच आसान नहीं था, क्योंकि वह मुझसे लंबी थी। 3 बच्चों की मां भी मैरी कॉम 29 साल की इस बॉक्सर का खेल के प्रति जुनून ही कहेंगे, जो शादी और दो बच्चे होने के बावजूद उन्हें यहां तक लेकर आया। बेशक मेरी ने बॉक्सिंग रिंग में शानदार अचीवमेंट्स हासिल की हैं, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि कितनी मुश्किलों को झेलकर वह यहां तक पहुंची हैं। मेरी बेहद साधारण फैमिली से हैं और मेरी ने अपने बूते यहां तक का सफर पूरा किया है। पहला राउंड : दोनों ने अपने राइट पंच का अच्छा इस्तेमाल किया। मैरी ने कुछ पंच मारे। इनमें से कुछ अच्छे सही निशाने पर लगे। हना ने भी अपने राइट जैब का अच्छा इस्तेमाल किया, लेकिन मैरीकॉम अपनी फुर्ती से उनके अधिकतर पंचों को नाकाम करने में सफल रहीं। दूसरा राउंड : दोनों ने राइट जैब के साथ फिस्ट के संयोजन से हावी होने की कोशिश की। शुरुआत में हना ने अच्छे पंच मारे जो सटीक रहे। हालांकि, आखिर में मैरीकॉम ने दूरी बनाते हुए अपने लिए मौके बनाए और मौका मिलने पर पंच मार अंक बटोरे। तीसरा राउंड : शुरुआती एक मिनट में मैरीकॉम ने राइट और लेफ्ट जैब के संयोजन से तीन-चार अच्छे पंच स्कोरिंग एरिया में मार जजों को प्रभावित किया।  मैराकॉम को उन्हें संभालना थोड़ा मुश्किल हो गया लेकिन अनुभवी भारतीय बॉक्सर ने धैर्य बनाए रखा और जब-जब हना लापरवाह दिखीं तब पंच मार अंक बटोरे। उपलब्धियाँ व पुरस्कार मैरी कॉम ने सन् 2001 में प्रथम बार नेशनल वुमन्स बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीती। अब तक वह 10 राष्ट्रीय खिताब जीत चुकी है। बॉक्सिंग में देश का नाम रोशन करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2003 में उन्हे अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया एवं वर्ष 2006 में उन्हे पद्मश्री से सम्मानित किया गया। जुलाई 29, 2009 को वे भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए चुनीं गयीं। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्त्रीत्व को नई परिभाषा देकर अपने शौर्य बल से नए प्रतिमान गढ़ने वाली विश्व प्रसिद्ध मुक्केबाज श्रीमती एमसी मैरी कॉम 17 जून 2018 को वीरांगना सम्मान से विभूषित किया गया। नई दिल्ली में आयोजित 10 वीं एआईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप 24 नवंबर, 2018 को उन्होंने 6 विश्व चैंपियनशिप जीतने वाली पहली महिला बनकर इतिहास बनाया,"/>
वर्ल्ड चैम्पियनशिप में मैरी कॉम ने रचा इतिहास
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विश्व चैम्पियनशिप में छह गोल्ड जीतने वाली दुनिया की पहली महिला बॉक्सर बनी – मैरीकॉम

वर्ल्ड चैम्पियनशिप में मैरी कॉम ने रचा इतिहास 1    

भारतीय महिला मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम ने विश्व महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में छठी बार स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रच दिया. 48 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में यूक्रेन की हना ओखोता को 5-0 से हराया। 3 बच्चों की मां मैरीकॉम ने जीत के बाद जैसे ही तिरंगा उठाया उनके आंसू छलक गए।

 

अब तक के पदक जितने वालों मुक्केबाज में मैरीकॉम विश्व चैम्पियनशिप में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाली मुक्केबाज भी बनीं। उन्होंने छह स्वर्ण और एक रजत जीतकर क्यूबा के फेलिक्स सेवोन (91 किलोग्राम भारवर्ग) की बराबरी की। फेलिक्स ने 1986 से 1999 के बीच छह स्वर्ण और एक रजत पदक जीता था।

वर्ल्ड चैम्पियनशिप में मैरी कॉम ने रचा इतिहास 2

तिरंगा उठाते ही छलके आंसू

जीत के बाद मैरीकॉम ने कहा, ‘यह मेरे लिए बहुत मुश्किल समय रहा। मगर आप लोगों के प्यार ने ये काम भी संभव कर दिखाया । हालाँकि मैं वेट कैटेगरी से संतुष्ट नहीं थी। 51 किग्रा कैटेगरी ओलिंपिक में मेरे लिए मुश्किल होगा, लेकिन मैं खुश हूं। मैं इस जीत के लिए अपने सभी फेन्स को धन्यवाद देना चाहती हूँ । मैं आप सभी की तहेदिल से शुक्रगुजार हूं। यह जीत में अपने देश को समर्पित करती हूँ । हना से मुकाबले के बारे में उन्होंने कहा कि यूक्रेनी खिलाड़ी के खिलाफ मैच आसान नहीं था, क्योंकि वह मुझसे लंबी थी।

वर्ल्ड चैम्पियनशिप में मैरी कॉम ने रचा इतिहास 3

3 बच्चों की मां भी मैरी कॉम
29 साल की इस बॉक्सर का खेल के प्रति जुनून ही कहेंगे, जो शादी और दो बच्चे होने के बावजूद उन्हें यहां तक लेकर आया। बेशक मेरी ने बॉक्सिंग रिंग में शानदार अचीवमेंट्स हासिल की हैं, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि कितनी मुश्किलों को झेलकर वह यहां तक पहुंची हैं। मेरी बेहद साधारण फैमिली से हैं और मेरी ने अपने बूते यहां तक का सफर पूरा किया है।

वर्ल्ड चैम्पियनशिप में मैरी कॉम ने रचा इतिहास 4

पहला राउंड : दोनों ने अपने राइट पंच का अच्छा इस्तेमाल किया। मैरी ने कुछ पंच मारे। इनमें से कुछ अच्छे सही निशाने पर लगे। हना ने भी अपने राइट जैब का अच्छा इस्तेमाल किया, लेकिन मैरीकॉम अपनी फुर्ती से उनके अधिकतर पंचों को नाकाम करने में सफल रहीं।

दूसरा राउंड : दोनों ने राइट जैब के साथ फिस्ट के संयोजन से हावी होने की कोशिश की। शुरुआत में हना ने अच्छे पंच मारे जो सटीक रहे। हालांकि, आखिर में मैरीकॉम ने दूरी बनाते हुए अपने लिए मौके बनाए और मौका मिलने पर पंच मार अंक बटोरे।

तीसरा राउंड : शुरुआती एक मिनट में मैरीकॉम ने राइट और लेफ्ट जैब के संयोजन से तीन-चार अच्छे पंच स्कोरिंग एरिया में मार जजों को प्रभावित किया।  मैराकॉम को उन्हें संभालना थोड़ा मुश्किल हो गया लेकिन अनुभवी भारतीय बॉक्सर ने धैर्य बनाए रखा और जब-जब हना लापरवाह दिखीं तब पंच मार अंक बटोरे।

उपलब्धियाँ व पुरस्कार
मैरी कॉम ने सन् 2001 में प्रथम बार नेशनल वुमन्स बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीती। अब तक वह 10 राष्ट्रीय खिताब जीत चुकी है। बॉक्सिंग में देश का नाम रोशन करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2003 में उन्हे अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया एवं वर्ष 2006 में उन्हे पद्मश्री से सम्मानित किया गया। जुलाई 29, 2009 को वे भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए चुनीं गयीं।

मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्त्रीत्व को नई परिभाषा देकर अपने शौर्य बल से नए प्रतिमान गढ़ने वाली विश्व प्रसिद्ध मुक्केबाज श्रीमती एमसी मैरी कॉम 17 जून 2018 को वीरांगना सम्मान से विभूषित किया गया। नई दिल्ली में आयोजित 10 वीं एआईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप 24 नवंबर, 2018 को उन्होंने 6 विश्व चैंपियनशिप जीतने वाली पहली महिला बनकर इतिहास बनाया,

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