'पैड वुमन' बनने की कहानी - पैसे की तंगी से शुरू हुई कहानी बता दें कि स्नेहा और सुमन के 'पैड वुमन' बनने की कहानी पैसे की तंगी से शुरू हुई। स्नेहा एक किसान की बेटी है। स्नेहा की मानें तो वह पुलिस भर्ती की कोचिंग ले रही थी और उसी का खर्च निकालने के लिए वह एक्शन इंडिया संस्था से जुड़ी। सैनिटरी पैड बनाने की प्रेरणा - सुमन की शादी 2010 में काठीखेड़ा गांव निवासी बलराज के साथ हुई थी। जल्दी सुमन गांव में एक एक्शन इंडिया संस्था से जुड़ी गई, जो महिलाओं के लिए काम करता था। वहीं, सुमन को सैनिटरी पैड बनाने की प्रेरणा मिली। इस काम में उन्होंने रिश्ते में ननद स्नेहा और उनकी सहेलियों को भी जोड़ा। इस फिल्म को फिल्म एक्शन इंडिया संस्था की हापुड़ कोऑर्डिनेटर शबाना के साथ अमेरिका से एनजीओ के कुछ लोग आए थे। उन्होंने महिलाओं के मासिक धर्म को लेकर फिल्म बनाने के बात शबाना के सामने रखी। स्नेह और सुमन ने साहस जुटाया और फिल्म में काम करने के लिए परिवार वालों को मना लिया, उसके बाद फिल्म ऑस्कर के लिए नामित हुई और अब फिल्म को डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट श्रेणी में ऑस्कर पुरस्कार मिला है। ऑस्कर विनर्स की पूरी लिस्ट... "/>
हापुड़ की बेटियों पर बनी शॉर्ट फिल्म ने ऑस्कर जीता
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‘पीरियड-एंड ऑफ सेंसेंस’ ने बेस्ट डॉक्युमेंट्री शॉर्ट सबजेक्ट कैटिगरी में ऑस्कर जीता

यूपी के छोटे से जिले हापुड़ में एक समाजसेवी संस्था से जुड़ी कुछ महिलाओं ने एक सपना देखा। सपना था ग्रामीण महिलाओं को माहवारी के दौरान सैनिटरी पैड इस्तेमाल करने के लिए जागरूक करना। जिला मुख्यालय से लगभग सात किमी दूर गांव काठीखेड़ा से जुड़ी कुछ महिलाओं ने अपने गांव से ही इस सफर को शुरू करने की सोची.काठी खेड़ा की इन महिलाओं के हौसले को बताती डॉक्यूमेंटरी पीरियड। एंड ऑफ सेंटेंस ने ऑस्कर अवार्ड के शॉर्ट सब्जेक्ट डॉक्यूमेंटरी वर्ग में अवार्ड जीता है। इससे जुड़ी हापुड़ की दो बेटियां भी यह पुरस्कार लेने ऑस्कर समारोह में भाग लेने के लिए अमेरिका पहुंची हैं।

हापुड़ की बेटियों पर बनी शॉर्ट फिल्म ने ऑस्कर जीता 1

‘पैड वुमन’ बनने की कहानी –
पैसे की तंगी से शुरू हुई कहानी बता दें कि स्नेहा और सुमन के ‘पैड वुमन’ बनने की कहानी पैसे की तंगी से शुरू हुई। स्नेहा एक किसान की बेटी है। स्नेहा की मानें तो वह पुलिस भर्ती की कोचिंग ले रही थी और उसी का खर्च निकालने के लिए वह एक्शन इंडिया संस्था से जुड़ी।

सैनिटरी पैड बनाने की प्रेरणा –

सुमन की शादी 2010 में काठीखेड़ा गांव निवासी बलराज के साथ हुई थी। जल्दी सुमन गांव में एक एक्शन इंडिया संस्था से जुड़ी गई, जो महिलाओं के लिए काम करता था। वहीं, सुमन को सैनिटरी पैड बनाने की प्रेरणा मिली। इस काम में उन्होंने रिश्ते में ननद स्नेहा और उनकी सहेलियों को भी जोड़ा।

इस फिल्म को फिल्म एक्शन इंडिया संस्था की हापुड़ कोऑर्डिनेटर शबाना के साथ अमेरिका से एनजीओ के कुछ लोग आए थे। उन्होंने महिलाओं के मासिक धर्म को लेकर फिल्म बनाने के बात शबाना के सामने रखी। स्नेह और सुमन ने साहस जुटाया और फिल्म में काम करने के लिए परिवार वालों को मना लिया, उसके बाद फिल्म ऑस्कर के लिए नामित हुई और अब फिल्म को डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट श्रेणी में ऑस्कर पुरस्कार मिला है।

ऑस्कर विनर्स की पूरी लिस्ट…

  • बेस्ट पिक्चर: ग्रीनबुक
  • बेस्ट डायरेक्टर: अलफॉन्सो क्यूरॉन (रोमा)​
  • बेस्ट एक्ट्रेस: रामी मालेक ​
  • बेस्ट एक्टर: ओलिविया कोलमन ​
  • बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस: रेजिना किंग
  • बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर: माहेरशला अली
  • बेस्ट सपोर्टिंग फिल्म: रोमा, अल्फोंसो क्येरन
  • बेस्ट एनिमेटेड फीचर फिल्म: स्पाइडर मैन
  • बेस्ट ओरिजनल स्क्रीनप्ले: ग्रीन बुक
  • बेस्ट एडैपटेड स्क्रीनप्ले: ब्लैकलांसमैन
  • बेस्ट ओरिजनल स्कोर: ब्लैक पैंथर
  • बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फीचर: फ्री सोलो
  • बेस्ट डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट: पीरियड एंड ऑफ सेन्टेंस (Period End Of Sentence)
  • बेस्ट लाइव एक्शन शॉर्ट: स्किन
  • बेस्ट एनिमेटेड शॉर्ट: बाओ
  • बेस्ट सिनेमेटोग्राफी: अल्फोंसो क्यूरेन को ‘रोमा’ के लिए
  • बेस्ट प्रोडक्शन डिजाइन: ब्लैक पैंथर
  • बेस्ट कॉस्टयूम डिजाइन: ब्लैक पैंथर
  • बेस्ट हेयर एंड मेकअप: वाइस
  • बेस्ट साउंड एडिटिंग: बोहेमियन रैपसोडी
  • बेस्ट साउंड मिक्सिंग: बोहेमियन रैपसोडी
  • बेस्ट विजुअल इफेक्ट: फर्स्ट मैन
  • बेस्ट एडिटिंग: बोहेमिया रैपसोडी
  • बेस्ट ओरिजनल सॉन्ग: शैलो

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