दर्द से होते हैं रिश्ते मजबूत.
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Pain is communication – क्या आपको दर्द पसंद है? क्या आप दर्द में रहना चाहते हो?

दुनिया में शायद ही कोई हो जिसे दर्द पसंद हो, दर्द किसी को पसंद नहीं, मुझे भी नहीं. दर्द में जब कोई इंसान रहता है, तो उसे एक इलाज और आराम की जरुरत लगती है. दर्द में इंसान दूसरे से संपर्क करता है और अपने दर्द को सुनाता अथवा बांटता है. यहाँ केवल शारीरिक दर्द की नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से मिले दर्द की बात हो रही है.

Emotional pain and physical pain

  • वैसे तो pain के अनेक रूप हैं मगर मुख्य रूप से दर्द शारीरिक और भावनात्मक नाम से ज्यादा पहचाने जाते हैं.
  • दोनों स्थिति में दर्द में डूबा इंसान हमेसा दूसरों से मिलता है, दूसरों से अपने विचारों को शेयर करता है.
  • शारीरिक रूप से मिले दर्द में इंसान सबसे पहले अपने परिवार के लोगों से संपर्क करता है. उनसे अपने विचारों को शेयर करता है.
  • परिवार वाले और एक चिक्तिसक दर्द में दुबे इंसान को तरह-तरह के सलाह और इलाज़ बतलाते हैं. जिससे दर्द में डूबे इंसान को एक हिम्मत मिलती है.
  • इंसान शारीरिक दर्द में खुद से ज्यादा अपने आस-पास के लोगों को जान पाता है. अपने और पराये कि पहचान होती है.
  • शारीरिक दर्द में इंसान अपने शरीर को भी जान सकता है कि उसका शरीर कितना शक्तिशाली और सहनशील है.
  • यदि हम दर्द को सहन कर सकते हैं तो हम अपने शरीर को और शक्तिशाली बनाते हैं मगर ये दर्द केवल सामान्य हो यदि दर्द असहनीय है तो चिकित्सक से जरूर मिलें.

Emotional pain

  • ये ऐसा दर्द है जिसमे हम अपने परिवार से भावनात्मक रूप से ज्यादा जुड़ पाते हैं.
  • ये दर्द शरीर से ज्यादा हमारे मन और चेतन पर ज्यादा चोट करता है. इस दर्द में खुद को संभालना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है.
  • खुद को अच्छी तरह से जानने के लिए भावनात्मक दर्द मुख्य भूमिका निभाता है.
  • भावनात्मक दर्द यदि ज्यादा हो जाये तो हम टूट भी सकते हैं. इसलिए जरुरी है कि हम खुद को इस दर्द में अकेला न छोड़े.
  • मायूसी और अकेलापन इसी दर्द में होता है.
  • भावनात्मक दर्द में लोग नेगेटिव हो जाते हैं. लोग नकारात्मक विचार से भर उठते हैं.
  • नकारात्मक सोच इतनी बढ़ जाती है की लोग आत्महत्या तक सोच लेते हैं.
  • शारीरिक दर्द से खतनाक होता है भावनात्मक दर्द.
  • शारीरिक दर्द को किसी भी डॉक्टरी इलाज द्वारा ठीक किया जा सकता है. मगर भावनात्मक दर्द यदि आपके मन-चेतन में घर बना ले तो उससे पीछा छुड़ाना मुश्किल होता है.

How to get rid of emotional and physical pain

  1. वैसे तो दोनो pain अपनी जगह एक खतरनाक रूप ले सकते हैं.
  2. मगर भावनात्मक दर्द ज्यादा बढ़ जाये तो शरीरिक दर्द भी अपना घर बना ही लेता है.
  3. दर्द कैसे भी हो, कोई भी हो उससे पीछा छुड़ाना आवश्यक है.
  4. दर्द मिटने में दवाई के अलावा यदि कोई चीज़ है तो वो है सकारात्मक सोच.
  5. सकारात्मक सोच ऐसी दवा है जो शारीरिक दर्द से लेकर भावनात्मक दर्द तक सरे दुःख-दर्द को मिटा सकती है.
  6. सकारात्मक सोच को बनाये रखना जरुरी है.
  7. यदि इंसान उम्मीद न खोये और धैर्य बनाये रखे तो दोनों प्रकार के दर्द से बखूबी छुटकारा पाया जा सकता है.

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