भगवान राम और रावण में समानताएं
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भगवान राम के साथ उनके घोर शत्रु रावण का भी नाम लिया जाता है, राम की ऐसी कीर्ति में रावण का बड़ा योगदान है. सबसे कमाल की बात तो यह है कि, भगवान राम और रावण में ऐसी कई बातें हैं जो आपस में मेल खाती हैं जिसकी वजह से राम के साथ रावण का भी नाम लिया जाता है। आज हम आपको बताएँगे ऐसे ही कुछ बातें.

  • सर्वप्रथम भगवान राम और रावण के नाम में बड़ी समानता है। भगवान राम के नाम का पहला अक्षर ‘रा‘ है और रावण के भी नाम का भी पहला अक्षर ‘रा‘ है। इस नामाक्षर के गुण दोनों में ही नजर आते हैं। इस नामाक्षर के व्यक्ति हमेशा सजग और सक्रिय रहते हैं. यह भावुक होते हैं और रिश्तों को अहमियत देते हैं।

 

  • रावण ने रिश्तों की अहमियत को ध्यान में रखते हुए शूर्पणखा का बदला लेने के लिए सीता का हरण किया तो दूसरी ओर विभिषण का त्याग भी किया। यही बात राम में भी है सीता के लिए वह रावण की लंका तबाह कर देते हैं और अपनी मर्यादा के लिए पहले सीता का त्याग, फिर शत्रुघ्न को सुंदर नामक राक्षस की नगरी का राजा बनाकर अपने से दूर कर देते हैं। इसके बाद अपनी बात रखने के लिए लक्ष्मण तक को मृत्युदंड दे देते हैं।  अर्थात रावण और राम दोनों ने ही अपने जीवन काल में भाईयों का त्याग किया था।

 

  • दोनों की माताओं के नाम ‘क‘ अक्षर से है राम की माता का नाम कौशल्या है जबकि रावण की माता का नाम कैकशी है। यहां एक और कमाल की बात है कि राम की एक अन्य माता का नाम कैकेयी है जिन्होंने राम को वनवास भेजा.

 

  • भगवान राम और रावण की जन्मकुंडली में भी कई समानताएं। दोनों की ही कुंडली में पंच महापुरुष योग बना हुआ है जिसे ज्योतिषशास्त्र में बहुत ही शुभ योग माना गया है। ऐसे व्यक्ति अपने जीवन काल में खूब धन वैभव प्राप्त करते हैं और मृत्यु के बाद भी इनका नाम अमर रह जाता है।

 

  • दोनों के जीवन में एक और बड़ी समानता है। भगवान राम भोलेनाथ के परम भक्त थे। इसका प्रमाण है रामेश्वरम मंदिर। दूसरी ओर रावण की शिव भक्ति का प्रमाण देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम है। रावण की भक्ति से भगवान शिव स्वयं ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए थे और रावण के साथ लंका जाने के लिए राजी हो गए। लेकिन देवताओं की चाल में फंसकर रावण शिव जी को लंका नहीं ले जा सका और ज्योतिर्लिंग देवघर में ही स्थापित हो गया।

भगवन राम और रावण में कई समानताएं है मगर फिर भी भगवन राम की तरह रावण न हो सका. इसका कारन आप जानते है क्यों ऐसा हुआ?

इस मुख्य कारन ये रहा आपकी Computer Screen पर.

एक होता है विद्वान और एक विद्यावान । दोनों में आपस में बहुत अन्तर है। इसे हम ऐसे समझ सकते हैं, रावण विद्वान है और भवन राम विद्यावान हैं। रावण के दस सिर हैं । चार वेद और छह: शास्त्र दोनों मिलाकर दस हैं । इन्हीं को दस सिर कहा गया है । जिसके सिर में ये दसों भरे हों, वही दसशीश हैं । रावण वास्तव में विद्वान है ।
लेकिन फिर भी वह सीता जी का हरण करके ले आया । कईं बार विद्वान लोग अपनी विद्वता के कारण दूसरों को शान्ति से नहीं रहने देते । उनका अभिमान दूसरों की सीता रुपी शान्ति का हरण कर लेता है. बस यही एक छोटा मगर बड़ा अहम् कारन था रावण के राम न बनने का. रावण अपने अहम् और घमंड में मस्त हो कर खुद का मिटा दिया. राम के समान कई गुण होने के बाद भी रावण राम न बन सका.

News Reporter

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