जिंदादिली की मिसाल  स्मिता पाटिल
Spread the love

हिन्दी फ़िल्मों की सुप्रसिद्ध अभिनेत्री जिसने अपने सशक्त अभिनय से बॉलीवुड में ख़ास पहचान बनाई एवं अपने उत्कृष्ट अभिनय से सजी फ़िल्में ‘भूमिका’, ‘मंथन’, ‘चक्र’, ‘शक्ति’, ‘निशांत’ और ‘नमक हलाल’ के द्वारा आज भी दर्शको के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ती हैं। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं स्मिता पाटिल की.

स्मिता पाटिल के पिता शिवाजीराय पाटिल महाराष्ट्र सरकार में मंत्री थे एवं माँ समाज-सेविका थी। स्मिता पाटिल ने ‘फ़िल्म एण्ड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया’, पुणे से स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। स्मिता पाटिल का विवाह हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता राज बब्बर के साथ हुआ था, दोनों के एक पुत्र प्रतीक बब्बर है, प्रतीक बब्बर भी हिन्दी फ़िल्मों में सक्रिय हैं।

स्मिता जब महज 16 साल की थीं तभी वो न्यूज रीडर की नौकरी करने लगी थीं। ख़बर पढने के लिए स्मिता दूरदर्शन में जींस पहन कर जाया करती थीं लेकिन जब उन्हें न्यूज़ पढ़ना होता तो वो जींस के ऊपर से ही साड़ी पहन लेतीं थी ।

समाचार पड़ते पड़ते स्मिता को निर्माता निर्देशक श्याम बेनेगल से अचानक ही मिली और बेनेगल ने स्मिता की प्रतिभा को पहचान कर अपनी फ़िल्म ‘चरण दास चोर’ में एक छोटी सी भूमिका निभाने का अवसर दिया।फिर क्या था स्मिता ने मुड कर नहीं देखा, व्यावसायिक सिनेमा की ओर अपना रूख कर लिया। इस दौरान उन्हें तब के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के साथ ‘नमक हलाल’ और ‘शक्ति’ में काम करने का मौका मिला। यह फ़िल्में कामयाब रहीं।

स्मिता पाटिल के सशक्त अभिनय –
1985 में स्मिता पाटिल की फ़िल्म ‘मिर्च-मसाला’ प्रदर्शित हुई। सौराष्ट्र की आज़ादी के पूर्व की पृष्ठभूमि पर बनी इस फ़िल्म ने निर्देशक केतन मेंहता को अंतराष्ट्रीय ख्याति दिलाई। यह फ़िल्म सांमतवादी व्यवस्था के बीच पिसती औरत की संघर्ष की कहानी बयां करती है। यह फ़िल्म आज भी स्मिता पाटिल के सशक्त अभिनय के लिए याद की जाती है।

स्मिता के बारे में कुछ अनसुने पहलु –

  1. स्मिता पर लिखी एक किताब के अनुसार स्मिता पाटिल की मां स्मिता और राज बब्बर के रिश्ते को लेकर नाखुश थीं।
  2. प्रतीक के जन्म के कुछ घंटों बाद ही 13 दिसंबर 1986 को स्मिता का निधन हो गया।
  3. स्मिता को वायरल इन्फेक्शन की वजह से ब्रेन इन्फेक्शन हुआ था।
  4. स्मिता के अंग एक के बाद एक फ़ेल होते चले गए।
  5. स्मिता अपने आखिरी दिनों में बहुत अकेलापन महसूस करती थीं।
  6. स्मिता की मौत के बाद 14 फिल्में रिलीज हुईं थीं।
  7. स्मिता पाटिल के नाम पर फिल्मी दुनिया में आज भी ‘स्मिता पाटिल अवॉर्ड’ दिया जाता है।

 

स्मिता पाटिल को मिले हुए पुरस्कार
o राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार (1977, 1980),
o फिल्मफेयर पुरस्कार (1978, 1981,1982)
o पद्म श्री पुरस्कार (1985)

News Reporter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *