योग के प्रकार -Types of Yoga
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आज हम indianwomenlife पर योग के सही तरीके और उनके फायदे के बारे में sort में बात करेंगे.

योग हमारे शरीर, मन, भावना एवं ऊर्जा के स्‍तर पर काम करता है। इसकी वजह से मोटेतौर पर योग को चार भागों में बांटा गया है. आज कल एक्ट्रेस के बीच में भी योग का बहुत ट्रेंड्स चल रहा है. जिसको देखो वो अपने तरीके से योग की क्लासेज चला रहा है.. ये भी सही की एक्ट्रेस को फिट रहने की जरुरत पड़ती है और वो अपने काम के हिसाब से अपने योग टिप्स सेलेक्ट कर लेती हैं.. एक डांसर को भी योग का ज्ञान हो न जरुरी होता.

हमारे देश में योग अब बहुत प्रचलित हो गया है। योग करके हम अपने शरीर की अनेक बीमारियों को दूर कर सकते है। यह बीमारियाँ ही नही ठीक करता बल्कि अवसाद, चिंता, डिप्रेशन, मोटापा, मनोविकारों को भी दूर भगाता है। योग से अनेक लाभ है।

 

 

महिलाओं के लिए योग के महत्व की बात करें तो किशोरावस्था से लेकर मातृत्व, मीनुपाउज वाली उम्र से लेकर बुढ़ापे तक महिलाएं कई दौर से गुजरती है, जिसमें योग की खास भूमिका है। महिलाओं में शारीरिक बदलाव आने के बाद उसकी मानसिक परेशानी बढ़ सकती है और जीवन में असंतुलन आ सकता है। ऐसे में महिलाओं के जीवन के हर फेज में उनके लिए नियमति तौर पर योग से जहां शारीरिक तौर पर संतुलित बनाए रखता है तो वहीं इससे मानसिक तौर पर शांति भी मिलती है।

 

योग करने का सही तरीका – Right Ways for Yoga

योग के लिए सूर्योदय और सूर्यास्त का समय सबसे अच्छा होता है। स्नान करने के बाद ही योग करना चाहिये। इसे हमेशा खाली पेट करना चाहिये। सूती कपड़े पहनकर योग करना अच्छा रहता है। योग करने के 30 मिनट बाद ही कुछ खाना चाहिये। इसे योग गुरु या एक्सपर्ट से सही तरीका सीखकर करना चाहिये। हमेशा प्रशिक्षित योग गुरु से सीखना चाहिये। किसी दरी या मैट बिछाकर करना चाहिये। योग हमेशा शांत वातावरण में करना चाहिये।

इसे करते समय सही तरह से श्वास छोड़ना और लेना आना चाहिये। कई लोग जबरदस्ती क्षमता से अधिक अपने शरीर के अंगो- हाथ, पैरों, जांघो, कमर को मोड़ देते है। खुद के साथ जबरदस्ती बिलकुल नही करनी चाहिये। योग को जल्दी जल्दी नही करना चाहिये। कुछ लोग जल्दी जल्दी कपालभांति और अनुलोम विलोम जैसे आसान करते है। वो सोचते है की कुछ ही दिन में उनको फायदा शुरू हो जाएगा। पर ऐसा नही है।

 

योग के प्रकार -Types of Yoga

मंत्र योग–

मंत्र का समान्य अर्थ है- ‘मननात् त्रायते इति मंत्रः‘। इस प्रकार के योग का सम्बन्ध मन से है। इसे करके मन पर नियन्त्रण किया जा सकता है। मन से उत्पन्न होने वाली स्वस्थ तरंगे हमे लाभ पहुंचाती है।
हठयोग- इसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, भ्रमध्येहरिम् और समाधि प्रकार का 8 योग होता है।

 

कुंडलिनी योग-

जब साधक चित्त् में चलते, बैठते, सोते और भोजन करते समय हर समय ब्रह्म का ध्यान करते है तब उसे कुंडलिनी योग कहते है।

 

राजयोग-

महर्षि पतंजलि द्वारा रचित अष्टांग योग में राजयोग का वर्णन मिलता है। इसका उद्देश्य मन की इक्षाओ को नियंत्रित करना है।

 

योग करने से अनेक फायदे है। इससे अस्थमा, रक्तचाप, पाचनविकार, मधुमेह, गठिया जैसी अनेक बीमारियाँ ठीक होती है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बनी रहती है

  • वजन कम करता है – योग के द्वारा लोग अपने बढ़े हुए वजन में कमी कर सकते है। सूर्य नमस्कार और कपालभाति, प्राणायाम जैसे आसन को हर दिन 20 मिनट करने से व्यक्ति अपना वजन आसानी से कम कर सकते है।
  • अवसाद, चिंता और डिप्रेशन दूर करता है– आज की जिन्दगी में लोगो के जीवन में बहुत तनाव बढ़ गया है। तनाव के कारण ही उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारियाँ, मधुमेह जैसे अनेक बीमारियाँ होती है। अवसाद, चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याओ को योग द्वारा आसानी से दूर किया जा सकता है।
  • ऊर्जा और चुस्ती फुर्ती में वृद्दि- योग के द्वारा हम अपने शरीर की ऊर्जा में वृद्धि कर सकते है। अशुद्ध खान-पान की वजह से अब लोगो में पहली वाली ताकत, चुस्ती फुर्ती और ऊर्जा नही रह गयी है। अब 30-40 साल के बाद स्त्री पुरुष दोनों में कोई न कोई बीमारी हो जाती है। लोग जरा सा काम करने पर थकान और कमजोरी की शिकायत करते है। इसलिए लोगो को योग जरुर करना चाहिये।
  • आत्मिक शांति की प्राप्ति– योग करने से हम आध्यात्मिक शांति मिलती है। मन प्रसन्न और खुशनुमा रहता है

News Reporter

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