क्या आप निर्णय लेने से डरते हैं
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आज हम बात करेंगे Decidophobia यानि निर्णय लेने में डर लगना

हम कई बार ऐसी स्थिति में उलझ जाते हैं जब हम कोई भी डिसिशन लेने में सकोंच महसूस करते हैं. हम जो भी डिसिशन लेते है वो कभी सही लगता है तो कभी गलत. ऐसी स्थिति में हम कोई भी नतीजा नहीं निकाल पाते हैं. मतलब डिसिशन मेकिंग हमारा बिलकुल भी सही नहीं होता है.

Decidophobia से पहले हम जानेगे की आखिर निर्णय लेने की सही प्रक्रिया होती क्या है

निर्णय लेते समय हमारे पास दो या दो से अधिक विकल्प होते हैं. इन विकल्पों में से हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए किसी एक विकल्प को चुनना पड़ता है. अब यहाँ पर निर्णय लेने के लिए तीन तरीके हैं.

  • पहले – विकल्प यानि alternatives
  • दूसरा – हमारी पसंद यानि choice और
  • तीसरा – उद्देश्य (Objectives)

पहला चरण – विकल्प से आप समझ गए होंगे की जब हमारे पास दो या दो से अधिक विकल्प मौजूद होते है तो हम सोच नहीं पाते हैं कि हमारे लिए कौनसा सही विकल्प होगा. इसके लिए आपको आगे के दो चरणों को ध्यान से पड़ना पड़ेगा.

दूसरा चरण – Choice यानि हमारी पसंद. अब हमको अपने विकल्प में से अपनी पसंद को चुनना होगा कि हमें क्या पसंद है, क्यूंकि किसी भी काम को करने के लिए हमारा उसमे इंटरेस्ट होना जरुरी है.

तीसरा चरण – तीसरा चरण बहुत महत्वपूर्ण हैं और वो है उद्देश्य. जब हमारे पास विकल्प मौजूद हों और हमारी पसंद का काम भी तो फिर हम को हमारे काम का लक्ष्य यानि उद्देश्य का पता होना चाहिए.  हमारे कोई भी काम का उद्देश्य हमारे या किसी अन्य कि भलाई होना जरुरी होता है. ये तीनों चरण यदि पुरे हों तो हमें उद्देश्य लेने में आसानी होगी.

अब हम बात करेंगे कि आखिर हमें निर्णय लेने में डर क्यों लगता है-

क्या है Decidophobia

परिणाम – जब हम अपने निर्णय लेने ले पहले ही उसके परिणाम के बारे में सोचते हैं तो हम डर जाते है और अलग-अलग प्रतिक्रिया हमारे मन में आने लगती हैं.  जैसे कि हम बारिश में बाहर निकले तो हम बाहर निकलने से पहले ही भीगने का डर सताने लगता है. जिस कारन

असमंजस – जब हम किसी बात को करने से पहले बार-बार उसके पॉजिटिव और नेगेटिव बातों कि कल्पना करने लगते हैं. जैसे कि मान लो अपने ऑफिस में अपने बॉस से छुट्टी मांगने के पहले ही सोचने लगते है कि मांगे या न मांगे.

नेगेटिव थिंकिंग – कुछ लोगो को हमेशा नकारात्मक सोचने की आदत होती है. वो हर काम को करने से पहले ही उसका गलत परिणाम को मान कर बैठ जाते हैं.

असफलता – हो सकता है की आपने कभी किसी काम को अपनी सोच के अनुसार किया हो और उसमे असफलता हांसिल हुई हो तो आपको ये असफलता ही आपके डिसाइडोफोबिया का कारण बन सकती है.

डिसाइडोफोबिया से कैसे बचें –

  • हमेशा positive सोचें.
  • बुरे परिणाम के बारे में न सोचें.
  • परिणाम के बड़े होने पर उसको टुकड़ों में पूरा करें
  • दूसरों से ज्यादा खुद अपनी मदद करें
  • ईश्वर के साथ-साथ खुद पर भरोसा रखें आत्मविश्वासी बनें.

News Reporter

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