इंसान कोमा में क्यों जाता है
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आपने फिल्मो या किसी भी सीरियल में आपने देखा होगा की कोई व्यक्ति कोमा में चला गया है. आख़िर कोमा में जाने का मतलब होता क्या है? और कोमा को हिंदी में क्या बोलते हैं. मैंने कुछ जानकारी जुटाई है जो आपके साथ शेयर करना चाहती हूँ.

आइये जानते है कोमा के बारे में –

कोमा को हिंदी में निश्चेतनता कहते हैं

चिकित्सा के क्षेत्र में निश्चेतनता एक असामान्य गाढ़ी तंद्रा अर्थात गहरी नींद की दशा है, जो किसी रोग के काल में या उसके फलस्वरूप किसी विषम आघात से उत्पन्न हो सकती है। इसमें व्यक्ति की चेतना लगभग नष्ट सी हो जाती है और बहुत समय तक वैसी ही दशा बनी रहती है। इस कोमा की दशा में व्यक्ति किसी भी बाहरी साधन से जगाया नहीं जा सकता न ही दर्द या प्रकाश आदि से उस पर कोई असर होता; इसका मतलब ये भी नहीं होता की वो ध्यान में चला गया हो. इससे निद्रा-जागृति के चक्र से कोई सम्बन्ध नहीं है; बस व्यक्ति की अपनी क्रियाएँ करना बन्द हो जाती है ।

पूर्व में जब तकनीक ने तरक़्की नहीं की थी, ऐसे कोमा में चले जाने वाले मरीज़ों को बहुत दिनों तक रख पाना आसान नहीं होता था. डॉक्टर्स के हिसाब से उस मरीज के ठीक होने की कोई आस बाक़ी नहीं रहती थी तो उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाता था. सबसे आसान और भरोसेमंद तरीक़ा था कि किसी मरीज़ को उसके नाम से चीख कर तीन बार पुकारा जाता था. अगर मरीज़ नाम सुनने पर हरकत करता था तो डॉक्टर उसका आगे का इलाज करते थे. वरना उसे मुर्दा घोषित कर दिया जाता था.

अब टेक्नोलॉजी बहुत ज्यादा बढ़ गई है आज के समय में कोमा के मरीज़ में ठीक होने की पूरी गुंजाइश होती है. लेकिन डीप कोमा में मरीज़ का दिमाग लंबे समय के लिए सो जाता है. ऐसे में दिमाग़ में खराबी बढ़ने लगती है. वो होश में आने के बाद भी अपनी पहले जैसे ज़िंदगी नहीं गुज़ार सकते. जबकि सिर्फ कोमा में जाने वाला मरीज़ ठीक होने पर बीमारी से पहले की तरह अपनी ज़िंदगी जी सकता है.

साइंस के मुताबिक़ एक ही झटके में किसी भी जीव के सभी हिस्से काम करना बंद नहीं करते. इसीलिए इसे मौत नहीं कहा जा सकता. साइंस के मुताबिक़ मौत के कई दिन बाद तक त्वचा और दिमाग़ की कोशिकाएं ज़िंदा रहती हैं. यहां तक कि आखरी सांस लेने के लंबे समय के बाद भी हमारे जींस काम करते रहते हैं.

जब तक मरीज़ के दिल की धड़कन काम कर रही है तो, इसका मतलब है कि उसके बाक़ी अंगों को ऑक्सीजन और ख़ून दोनों मिल रहा है. इसलिए इन अंगों को सुरक्षित रखा जा सकता है.

निश्चतनता के मुख्य कारण ये हैं :

  • किसी दुर्घटना में आघात (trauma), रक्तस्राव तथा प्रघात (shock),
  • उपापचय संबंधी रोग, जैसे मधुमेह, यूरीमिआ आदि
  • दुर्घटना में रक्तस्राव का अधिक होना,
  • तानिकाओं, (meninges) और मस्तिष्क के उग्र संक्रमण,
  • अत्यधिक रक्त की हानि या अत्यधिक उच्च ज्वर का होना।

इस के लिए डॉक्टर्स ने निश्चेतनता के रोगी की सतर्क देखभाल के लिए कुछ तरीके या सावधानी बताई हैं मतलब प्राथमिक चिकित्सा में निम्नलिखित बातों पर अवश्य ध्यान देना चाहिए :

1. श्वास मार्ग को स्वच्छ और खुला रखना आवश्यक है। रोगी को करवट के बल लिटाना चाहिए, पीठ के बल नहीं। जिह्वा को सामने खींचकर रखना चाहिए जिससे वह पीछे गिरकर श्वास मार्ग को रोक न दें और बगल के दाँतों से कट न जाए। स्राव भी गले में एकत्र न होने पाए। ऑक्सीजन भी दिया जा सकता है।

2. रोगी का निर्जलीकरण रोकने के लिए उसे पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना चाहिए। आवश्यक होने पर अंत: शिरा द्वारा द्रव दिया जा सकता है।

3. रबर की नासिकानलिका (nasal tube) द्वारा, रोग के दीर्घकालिक होने पर, उच्च कैलोरी वाला आहार पर्याप्त मात्रा में देना उचित है।

4. त्वचा, कोष्ठवद्धता और आँतों की ओर भी ध्यान देना चाहिए

रोगी को अस्पताल या किसी डॉक्टर के पास शीघ्र ही पहुँचा देना चाहिए और डॉक्टर से प्रत्यक्ष देखा हुआ सारा हाल बता देना चाहिए।

कोमा में भिन्न भिन्न कारणों के अनुसार चिकित्सा के आयोजन भी भिन्न होते हैं।

सोर्स :wikipaedia एवं BBC Hindi

News Reporter

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