विश्व हदय दिवस : करें अपने दिल की हिफाजत
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अव्यवस्थित जीवनशैली और असंतुलित खानपान के चलते दुनिया भर में हृदय रोगियों की संख्या तेज़ी से बढ़ती जा रही है। भागती-दौड़ती ज़िंदगी में लोगों को अपने स्वास्थ्य की ओर ध्यान देने का मौका नहीं मिलता, जिसका उन्हें भारी खमियाजा भुगतना पड़ता है।  Heart हमारे शरीर का वह महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके बिना हमारा जीवन नहीं है। विश्व हृदय दिवस हर वर्ष 29 सितम्बर को मनाया जाता है। इस दिन विश्व हृदय फेडरेशन दुनिया को दिल की तकलीफों और उससे बचने के संदेश देती है। विश्व में हृदय रोग से होने वाली मृत्यु दर अधिक है।

आज हर पांचवां व्यक्ति इसकी चपेट में है। विश्व हदय दिवस की शुरुआत 1999 में एन्टोनी बेस ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर की थी, जिसका मकसद हृदय संबंधी लोगों को जागरूक करना था। हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार दिल की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। इसके लिए कोई निर्धारित उम्र नहीं है। आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में एक दिल ही है, जिस पर सबसे अधिक बोझ पड़ता है। तनाव, थकान, प्रदूषण आदि कई कारणों से रक्त का आदान-प्रदान करने वाले इस अति महत्वपूर्ण अंग को काम करने में मुश्किल होती है।

लोग कई बार दिल की बीमारी के बारे में पर्याप्त जानकारी न होने के कारण इसके लक्षणों की अनदेखी कर लेते हैं और जानलेवा स्थिति तक पहुंच जाते हैं। सीने में जलन, पेट में दर्द, धमनियों में रुकावट, सीने में दबाव और बाएं कंधे पर दर्द, दिल की बीमारी की दस्तक हो सकता है। पैरों में दर्द, सूजन, पसीना आना, घबराहट होना भी खतरे की घंटी हो सकता है। हृदय रोग से बचने के लिए सबसे ज़रूरी है, अपनी जीवनशैली व खान-पान को बेहतर करें। हरी पत्तेदार सब्ज़ियों, फलों का सेवन अधिक करें। घी, मक्खन और चर्बी बढ़ाने वाली चीज़ों से परहेज रखें। हल्का व्यायाम, सुबह की सैर तथा ध्यान करें। हमेशा प्रसन्न रहें। सीढ़ियों का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करें। अपने दैनिक जीवन में पैदल चलने की आदत डालें। इसलिए विश्व हृदय दिवस लोगों में यह भावना जागृत करता है कि वह हृदय की बीमारियों के प्रति सचेत रहें और हृदय की हिफाजत दिल से करें। इस तरह हर वर्ष लगभग 10.5 मिलियन लोग जो हृदय लोग के कारण दम तोड़ जाते हैं, उनका बहुमूल्य जीवन बचाने के लिए हम सभी को जागरूकता पैदा करने की ज़रूरत है।

वर्ल्‍ड हार्ट डे 2018 : इन Yoga आसनों की मदद से दिल की बीमारियों को रखें दूर

सर्वांगासन :

इस आसन में पहले पीठ के बल सीधा लेट जाएं फिर दोनों पैरों को मिलाएं, हाथों की हथेलियों को दोनों ओर जमीन से सटाकर रखें। अब सांस अन्दर भरते हुए आवश्यकतानुसार हाथों की सहायता से पैरों को धीरे-धीरे 30 डिग्री, फिर 60 डिग्री और अन्त में 90 डिग्री तक उठाएं। इससे आपकी पाचन शक्ति ठीक रहती है और रक्त का शुद्धिकरण होता है।

स्वस्तिकासन :

दरी या कंबल बिछाकर बैठ जाएं। इसके बाद दाएं पैर को घुटनों से मोड़कर सामान्य स्थिति में बाएं पैर के घुटने के बीच दबाकर रखें और बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाएं पैर की पिण्डली पर रखें। फिर दोनों हाथ को दोनों घुटनों पर रखकर ज्ञान मुद्रा बनाएं। ज्ञान मुद्रा के लिए तीन अंगुलियों को खोलकर तथा अंगूठे व कनिष्का को मिलाकर रखें। अब अपनी दृष्टि को नाक के अगले भाग पर स्थिर कर मन को एकाग्र करें। अब 10 मिनट तक इस अवस्था में बैठें। इस योग से एकाग्रता बढ़ती है साथ ही हृदय का तनाव कम होता है।

ताड़ासन :

पैरों को एक साथ मिलाकर खड़े हो जाएं। अब पंजों पर जोर देते हुए धीरे-धीरे ऊपर उठें और दोनों हाथों को मिलाकर ऊपर की ओर तान दें। इस अवस्था में पूरे शरीर का भार पैरों के पंजों पर होगा और पूरे शरीर को सीधा ऊपर की ओर तानेंगे। इसे करते समय पेट को अंदर की ओर खींचना चाहिए तथा सीना बाहर की ओर तना हुआ रहना चाहिए। कमर-गर्दन बिल्कुल सीधी रखें। इस आसन का अभ्यास कम से कम 5 बार करें।

शीर्षासन :

दोनों घुटने जमीन पर टिकाते हुए फिर हाथों की कोहनियां जमीन पर टिकाएं। फिर हाथों की अंगुलियों को आपस में मिलाकर ग्रिप बनाएं, तब सिर को ग्रिप बनी हथेलियों को भूमि पर टिका दें। इससे सिर को सहारा मिलेगा। फिर घुटने को जमीन से ऊपर उठाकर पैरों को लंबा कर दें। फिर धीरे-धीरे पंजे टिकाएं और दोनों पैरों को पंजों के बल चलते हुए शरीर के करीब अर्थात सिर के नजदीक ले आते हैं और फिर पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए उन्हें धीरे से ऊपर उठाते हुए सीधा कर देते हैं तथा पूर्ण रूप से सिर के बल शरीर को टिका लेते हैं। इससे ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है साथ ही हृदय गति सामान्य रहती है।

स्वस्तिकासन :

दरी या कंबल बिछाकर बैठ जाएं। इसके बाद दाएं पैर को घुटनों से मोड़कर सामान्य स्थिति में बाएं पैर के घुटने के बीच दबाकर रखें और बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाएं पैर की पिण्डली पर रखें। फिर दोनों हाथ को दोनों घुटनों पर रखकर ज्ञान मुद्रा बनाएं। ज्ञान मुद्रा के लिए तीन अंगुलियों को खोलकर तथा अंगूठे व कनिष्का को मिलाकर रखें। अब अपनी दृष्टि को नाक के अगले भाग पर स्थिर कर मन को एकाग्र करें। अब 10 मिनट तक इस अवस्था में बैठें। इस योग से एकाग्रता बढ़ती है साथ ही हृदय का तनाव कम होता है।

 

हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण : Signs of heart attack

सीने में दर्द :

हार्ट अटैक का सबसे पहला लक्षण होता है दिल के करीब सीने में दर्द। यह बाजू, जबड़े और पीठ तक जाता है। ज्‍यादा तनाव से सीने में भारीपन महसूस होता है और खांसी भी आती है। आराम करने से या सॉर्बिट्रेट की गोली लेने से भी इस समस्या में राहत नहीं मिलती है। इस तरह का दर्द आमतौर पर एक घंटे से अधिक समय तक रहता है।

पसीना आना :

हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों में से एक है सीने में दर्द के साथ सामान्‍य से अधिक पसीना आना। मरीज को पहले से कोई परेशानी नहीं होती है और बिना किसी वजह के अचानक उसे पसीना आने लगता है।

सांस लेने में तकलीफ :

आराम करते समय भी घबराहट या घुटन जैसा महसूस करना, हृदयाघात के प्रमुख लक्षणों में से एक होता है। मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है या ऐसा लगता है जैसे उसे सांस लेने में काफी मेहनत करनी पड़ रही है।

आंखों के सामने अंधेरा छा जाना:

यह समस्‍या ब्‍लड प्रेशर कम होने या दिल की धड़कन कम होने की वजह से हो सकती है। इसे बिलकुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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