क्या होता है अस्थमा (दमा)
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अस्थमा को बार बार होने वाली घरघराहट, सांस लेने में होने वाली तकलीफ, सीने में जकड़न और खांसी से पहचाना जाता है। खांसी के कारण फेफड़े से कफ़ उत्पन्न हो सकता है लेकिन इसको बाहर लाना काफी कठिन होता है, जटिल तथा अपर्याप्त रूप से समझी गयी पर्यावरणीय और जीन संबंधी पारस्परिक क्रियाओं के संयोजन से अस्थमा होता है।

कुछ लोगों को हफ्तों या महीनों स्थिर अस्थमा हो सकता है और फिर अचानक तीव्र अस्थमा की स्थिति पैदा हो सकती है। अस्थमा पर अधिक प्रभावी ढंग से काबू पाने में आपकी सहायता करने के लिए यहां कुछ बुनियादी साँस लेने की तकनीकों और योग आसनों की एक सूची दी गई है :

योग के द्वारा अस्थमा (दमा) पर नियंत्रण

  • नाड़ी शोधन प्राणायाम –

अपने मन और शरीर को तनावमुक्त करने के लिए इस प्राणायाम से शुरुआत करें। इस सांस लेने की तकनीक के द्वारा कई श्वसन और परिसंचरण संबंधी समस्याओं का समाधान मिल जाता है।

  • कपाल भाती प्राणायाम

यह साँस लेने की तकनीक मन को शांत करती है और तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करती है। यह सभी नाड़ियों (ऊर्जा चैनल) को भी साफ करता है और रक्त परिसंचरण में सुधार करता है।

  • अर्ध मत्स्येंद्रासन

अर्ध मेरुदंड मरोड़ आसन छाती को खोलता है और फेफड़ों में ऑक्सीजन की आपूर्ति को सुधारता है, जिससे आपको अस्थमा की संभावना कम हो जाती है।

  • पवनमुक्तासन

अस्थमा के रोगियों के लिए यह योगासन अच्छा है क्योंकि यह उदर के अंगों की मालिश करता है और पाचन में और गैस के निर्गमन में मदद करता है।

  • सेतुबंधासन

सेतुमुद्रा छाती और फेफड़ों को खोलता है और थायरॉयड की समस्या को कम करता है। यह भी पाचन में सुधार लाता है और अस्थमा के रोगियों के लिए बहुत प्रभावी है।

  • भुजंगासन

कोबरा मुद्रा छाती का विस्तार करती है, रक्त परिसंचरण में सुधार करती है और अस्थमा के रोगियों के लिए बहुत लाभदायक है।

  • अधोमुख श्वानासन

यह मुद्रा मन को शांत करने में मदद करता है, तनाव से राहत देता है और अस्थमा और साइनेसाइटिस से पीड़ित लोगों के लिए अच्छा है।

  • बद्धकोणासन

बद्धकोणासन को तितली आसन भी कहते हैं, तितली आसन रक्त परिसंचरण को उत्तेजित करता है और उसमें सुधार करता है, थकान से राहत देता है और अस्थमा पर चिकित्सीय प्रभाव ड़ालता है।

  • पूर्वोत्तानासन

ऊपर की ओर तख्त के सदृश्य मुद्रा श्वसन प्रणाली में सुधार लाता है, थायरॉइड ग्रंथि को उत्तेजित करता है और कलाई, भुजाओं, पीठ और मेरुदंड को मजबूत करता है।

  • श्वासन

श्वासन में कुछ मिनट लेटकर अपना योग अभ्यास समाप्त करें। यह मुद्रा शरीर को ध्यान अवस्था में लाती है, आप को पुनर्जीवित करती है और चिंता और मानसिक दबाव को कम करने में भी मदद करती है।एक शांत और तनावमुक्त शरीर और मानसिकता अस्थमा से निपटने का सही तरीका है।

  • फल और सब्जियां से काम करे अस्थमा

अधिक से अधिक टमाटर, गाजर और पत्तेदार सब्जियां खाने से अस्थमा अटैक को कम किया जा सकता है। अस्थमा के मरीजों को रोजाना कम से कम एक सेब खाना चाहिए जिससे वे अस्थमा रोग से लड़ने में सक्षम हो सकें। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि वयस्कों में अस्थमा का मुख्य कारण फ्रूट्स, विटामिन सी, आयरन इत्यादि खाघ पदार्थों का सेवन ना करना है। यदि बच्चे शुरू से ही रोजाना फ्रूट्स इत्यादि खूब खाएंगे तो वे अस्थमा रोग से आसानी से बच सकते हैं।

 

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